{"_id":"6a8aef1c4bc92f30f006de22","slug":"forest-department-employees-will-stage-a-sit-in-protest-at-the-forest-ministers-residence-on-august-30-amritsar-news-c-59-1-asr1004-119301-2026-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amritsar News: वन विभाग कर्मचारी 30 अगस्त को वन मंत्री आवास पर देंगे धरना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amritsar News: वन विभाग कर्मचारी 30 अगस्त को वन मंत्री आवास पर देंगे धरना
Sun, 23 Aug 2026 06:31 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
Updated Sun, 23 Aug 2026 06:31 PM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। डेमोक्रेटिक वन विभाग कर्मचारी यूनियन 30 अगस्त 2026 को वन मंत्री के आवास के सामने धरना देगी। यूनियन पंजाब सरकार की 16 मई 2023 की नीति को खोखली बता रही है।
यूनियन का कहना है कि इस नीति के तहत कई कर्मचारियों को नियमित नहीं किया गया है। इसका कारण उनके रिकॉर्ड में त्रुटियां और सेवा में अंतराल बताया गया है। इन कर्मचारियों को कोई वित्तीय लाभ भी नहीं मिला है। यूनियन नेताओं ने वन मंत्री और स्क्रीनिंग रिव्यू समिति के साथ कई बैठकें कीं। ये बैठकें बेनतीजा रहीं और कर्मचारियों के रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियां दूर नहीं हुईं। हरिंदर कुमार और बलविंदर सिंह गंडीविंड ने कहा कि इस नीति ने कर्मचारियों को गुमराह किया है। नियमित किए कर्मचारियों को केवल 15 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है, जबकि नियमित दर्जा-4 कर्मचारी का मूल वेतन 18 हजार रुपये है। उन्हें महंगाई भत्ता, वेतन आयोग और अन्य वित्तीय लाभ भी नहीं दिए जा रहे हैं।
यूनियन ने वर्ष 2026 तक 10 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची में त्रुटियां बताईं। उन्होंने मांग की कि त्रुटियां दूर कर सूची को अंतिम रूप दिया जाए। ऐसे सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाए। वरिष्ठता सूची तैयार करते समय सेवा के सभी दिनों को गिना जाना चाहिए। वन विभाग में सेवानिवृत्ति आयु को लेकर भी दोहरा मापदंड है। कुछ कर्मचारियों की आयु 60 वर्ष और कुछ की 58 वर्ष दर्ज है, इसमें एकरूपता की मांग की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमृतसर। डेमोक्रेटिक वन विभाग कर्मचारी यूनियन 30 अगस्त 2026 को वन मंत्री के आवास के सामने धरना देगी। यूनियन पंजाब सरकार की 16 मई 2023 की नीति को खोखली बता रही है।
यूनियन का कहना है कि इस नीति के तहत कई कर्मचारियों को नियमित नहीं किया गया है। इसका कारण उनके रिकॉर्ड में त्रुटियां और सेवा में अंतराल बताया गया है। इन कर्मचारियों को कोई वित्तीय लाभ भी नहीं मिला है। यूनियन नेताओं ने वन मंत्री और स्क्रीनिंग रिव्यू समिति के साथ कई बैठकें कीं। ये बैठकें बेनतीजा रहीं और कर्मचारियों के रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियां दूर नहीं हुईं। हरिंदर कुमार और बलविंदर सिंह गंडीविंड ने कहा कि इस नीति ने कर्मचारियों को गुमराह किया है। नियमित किए कर्मचारियों को केवल 15 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है, जबकि नियमित दर्जा-4 कर्मचारी का मूल वेतन 18 हजार रुपये है। उन्हें महंगाई भत्ता, वेतन आयोग और अन्य वित्तीय लाभ भी नहीं दिए जा रहे हैं।
विज्ञापन
यूनियन ने वर्ष 2026 तक 10 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची में त्रुटियां बताईं। उन्होंने मांग की कि त्रुटियां दूर कर सूची को अंतिम रूप दिया जाए। ऐसे सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाए। वरिष्ठता सूची तैयार करते समय सेवा के सभी दिनों को गिना जाना चाहिए। वन विभाग में सेवानिवृत्ति आयु को लेकर भी दोहरा मापदंड है। कुछ कर्मचारियों की आयु 60 वर्ष और कुछ की 58 वर्ष दर्ज है, इसमें एकरूपता की मांग की गई है।
विज्ञापन