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डॉ. नवजोत सिद्धू ने ट्वीट कर विरसा वल्टोहा को बताया 'ड्रग लॉर्ड', आतंकी हूं बयान का दिया हवाला
Mon, 14 Sep 2020 02:44 PM IST
पंजाब ब्यूरो
अमर उजाला, अमृतसर
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Published by: पंजाब ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2020 02:44 PM IST
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नवजोत कौर सिद्धू
- फोटो : अमर उजाला
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बीते कई माह से चुप्पी धारण किए हुए पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने शिअद प्रवक्ता व पूर्व विधायक विरसा सिंह वल्टोहा पर 37 साल से चल रहे एक हत्या मामले पर ट्वीट कर उन्हें ड्रग लार्ड बताया है।
डॉ. सिद्धू ने ट्वीट में वल्टोहा का नाम लिखे बिना उनके (वल्टोहा) द्वारा वर्ष 2014 में विधानसभा में दिए गए एक बयान का हवाला दिया है। जिसमें वल्टोहा ने कहा था कि वह एक आतंकी (खाड़कू) थे, आतंकी हैं व आतंकी रहेंगें। साथ ही डॉ. सिद्धू ने वल्टोहा को स्थानीय ड्रग लार्ड बताते हुए लिखा है कि शायद इसी कारण उसे अधिक महत्व दिया गया।
बता दें, कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने 1983 से लटक रहे एक हत्या के मामले पर अपनी नाराजगी जताई थी। 1983 में आतंकवादियों ने मेदांता अस्पताल के एमडी डॉ. नरेश त्रेहन के पिता डॉ. सुदर्शन त्रेहन की हत्या उनके पट्टी स्थित क्लिनिक में कर दी थी। वल्टोहा पर इस हत्या में शामिल होने के आरोप थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने 37 साल से लटक रहे इस केस की कोई भी सुनवाई न होने पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इस केस के बारे में पंजाब सरकार से जवाब मांगा गया है। इस केस के बावजूद वल्टोहा तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं और दो बार जीत चुके हैं। 2017 में वे विधानसभा का चुनाव हार गए थे।
वल्टोहा का कहना है कि वह इस केस से 1991 में बरी हो गए थे। इस केस में उनके विरुद्ध कोई भी आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ था। इस संदर्भ में वह अपने दस्तावेज स्थानीय अदालत में जमा करवा चुके हैं। अब मामला अदालत में विचाराधीन है। इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया गया था।
दो वर्ष पहले एसआईटी ने वल्टोहा के विरुद्ध सप्लीमेंट्री चालान पेश किया था। इस मामले की फाइल थाना से गायब हो चुकी है।
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डॉ. सिद्धू ने ट्वीट में वल्टोहा का नाम लिखे बिना उनके (वल्टोहा) द्वारा वर्ष 2014 में विधानसभा में दिए गए एक बयान का हवाला दिया है। जिसमें वल्टोहा ने कहा था कि वह एक आतंकी (खाड़कू) थे, आतंकी हैं व आतंकी रहेंगें। साथ ही डॉ. सिद्धू ने वल्टोहा को स्थानीय ड्रग लार्ड बताते हुए लिखा है कि शायद इसी कारण उसे अधिक महत्व दिया गया।
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बता दें, कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने 1983 से लटक रहे एक हत्या के मामले पर अपनी नाराजगी जताई थी। 1983 में आतंकवादियों ने मेदांता अस्पताल के एमडी डॉ. नरेश त्रेहन के पिता डॉ. सुदर्शन त्रेहन की हत्या उनके पट्टी स्थित क्लिनिक में कर दी थी। वल्टोहा पर इस हत्या में शामिल होने के आरोप थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने 37 साल से लटक रहे इस केस की कोई भी सुनवाई न होने पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इस केस के बारे में पंजाब सरकार से जवाब मांगा गया है। इस केस के बावजूद वल्टोहा तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं और दो बार जीत चुके हैं। 2017 में वे विधानसभा का चुनाव हार गए थे।
वल्टोहा का कहना है कि वह इस केस से 1991 में बरी हो गए थे। इस केस में उनके विरुद्ध कोई भी आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ था। इस संदर्भ में वह अपने दस्तावेज स्थानीय अदालत में जमा करवा चुके हैं। अब मामला अदालत में विचाराधीन है। इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया गया था।
दो वर्ष पहले एसआईटी ने वल्टोहा के विरुद्ध सप्लीमेंट्री चालान पेश किया था। इस मामले की फाइल थाना से गायब हो चुकी है।