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सिखों व पंजाब के खिलाफ नफरत न फैलाएं : एसजीपीसी
Mon, 25 Sep 2023 07:14 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
Updated Mon, 25 Sep 2023 07:14 PM IST
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कहा- किसी भी देश की संसद में प्रधानमंत्री का बयान सामान्य नहीं माना जाता
भारत-कनाडा मामले में एसजीपीसी की कार्यकारिणी कमेटी ने विशेष प्रस्ताव किया पारित
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कार्यकारिणी कमेटी की बैठक में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा की संसद में वहां के निवासी सिख हरदीप सिंह निझर की हत्या के मामले में भारतीय एजेंसियों के अधिकारियों की संलिप्तता को लेकर लगाए गए आरोपों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
हरजिंदर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई एसजीपीसी कार्यकारिणी की बैठक में पारित विशेष प्रस्ताव में कहा गया कि किसी भी देश की संसद में प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया बयान सामान्य नहीं माना जाता। कनाडा के प्रधानमंत्री ने भारतीय एजेंसियों पर जो आरोप लगाए हैं, उसकी सच्चाई दोनों देशों को राजनीति से परे ईमानदारी से लोगों के सामने रखनी चाहिए। यदि इसे केवल राजनीति के कारण दबाया जाएगा तो यह मानवाधिकारों के साथ अन्याय माना जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सिखों और पंजाब के खिलाफ फैलाए जा रहे नफरत भरे प्रचार की भी कड़ी निंदा की गई है। कहा गया है, कि मीडिया के एक बड़े हिस्से द्वारा जानबूझकर भारत-कनाडा मुद्दे पर ही ध्यान केंद्रित किया गया है। सिखों का चरित्र हनन किया गया है। एक प्रस्ताव के माध्यम से एसजीपीसी कार्यकारिणी कमेटी ने भारत सरकार से मांग की कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लें और सिखों की छवि खराब करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे। यह भी स्पष्ट किया कि सिख समुदाय सभी धर्मों का सम्मान करता है और किसी के प्रति शत्रुता नहीं रखता है। कुछ लोग मौजूदा हालात को देशों के बीच फूट डालने के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। यह भी कहा गया कि सिखों की छवि खराब करने वाली ताकतों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और इसके साथ ही सिखों के बीच बढ़ते अविश्वास को खत्म करने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
इस विशेष प्रस्ताव के अलावा कार्यकारिणी ने कई अन्य निर्णय लिए और विभिन्न विभागों के मामलों पर भी चर्चा की। एसजीपीसी ने एक प्रस्ताव में जून 1984 में श्री अकाल तख्त साहिब पर हुए सैन्य हमले के दौरान जोधपुर जेल में बंद सिखों के मुकदमों की पैरवी करने वाले वकीलों और उनकी सहायता करने वाले लोगों को विशेष रूप से सम्मानित करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही सबसे लंबे केस वाले उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी काका सिद्दकदीप सिंह का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज होने पर उन्हें सम्मानित करने का भी निर्णय लिया गया है।
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बैठक में एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलदेव सिंह कायमपुर, जूनियर उपाध्यक्ष अवतार सिंह , महासचिव भाई गुरचरण सिंह ग्रेवाल, कमेटी सदस्य मोहन सिंह बंगी, जरनैल सिंह करतारपुर, सुरजीत सिंह तुगलवाल, बावा सिंह गुमानपुरा, बीबी गुरिंदर कौर भोलूवाला, गुरनाम सिंह जस्सल, परमजीत सिंह खालसा, शेर सिंह मंडवाला, बाबा गुरप्रीत सिंह रंधावा और मलकीत सिंह गहलाल, सचिव शिरोमणि कमेटी प्रताप सिंह, ओएसडी सतबीर सिंह धामी, उप सचिव सुखमिंदर सिंह, कुलविंदर सिंह रामदास आदि मौजूद थे।
— पंकज शर्मा
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भारत-कनाडा मामले में एसजीपीसी की कार्यकारिणी कमेटी ने विशेष प्रस्ताव किया पारित
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कार्यकारिणी कमेटी की बैठक में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा की संसद में वहां के निवासी सिख हरदीप सिंह निझर की हत्या के मामले में भारतीय एजेंसियों के अधिकारियों की संलिप्तता को लेकर लगाए गए आरोपों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
हरजिंदर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई एसजीपीसी कार्यकारिणी की बैठक में पारित विशेष प्रस्ताव में कहा गया कि किसी भी देश की संसद में प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया बयान सामान्य नहीं माना जाता। कनाडा के प्रधानमंत्री ने भारतीय एजेंसियों पर जो आरोप लगाए हैं, उसकी सच्चाई दोनों देशों को राजनीति से परे ईमानदारी से लोगों के सामने रखनी चाहिए। यदि इसे केवल राजनीति के कारण दबाया जाएगा तो यह मानवाधिकारों के साथ अन्याय माना जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सिखों और पंजाब के खिलाफ फैलाए जा रहे नफरत भरे प्रचार की भी कड़ी निंदा की गई है। कहा गया है, कि मीडिया के एक बड़े हिस्से द्वारा जानबूझकर भारत-कनाडा मुद्दे पर ही ध्यान केंद्रित किया गया है। सिखों का चरित्र हनन किया गया है। एक प्रस्ताव के माध्यम से एसजीपीसी कार्यकारिणी कमेटी ने भारत सरकार से मांग की कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लें और सिखों की छवि खराब करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे। यह भी स्पष्ट किया कि सिख समुदाय सभी धर्मों का सम्मान करता है और किसी के प्रति शत्रुता नहीं रखता है। कुछ लोग मौजूदा हालात को देशों के बीच फूट डालने के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। यह भी कहा गया कि सिखों की छवि खराब करने वाली ताकतों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और इसके साथ ही सिखों के बीच बढ़ते अविश्वास को खत्म करने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
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इस विशेष प्रस्ताव के अलावा कार्यकारिणी ने कई अन्य निर्णय लिए और विभिन्न विभागों के मामलों पर भी चर्चा की। एसजीपीसी ने एक प्रस्ताव में जून 1984 में श्री अकाल तख्त साहिब पर हुए सैन्य हमले के दौरान जोधपुर जेल में बंद सिखों के मुकदमों की पैरवी करने वाले वकीलों और उनकी सहायता करने वाले लोगों को विशेष रूप से सम्मानित करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही सबसे लंबे केस वाले उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी काका सिद्दकदीप सिंह का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज होने पर उन्हें सम्मानित करने का भी निर्णय लिया गया है।
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बैठक में एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलदेव सिंह कायमपुर, जूनियर उपाध्यक्ष अवतार सिंह , महासचिव भाई गुरचरण सिंह ग्रेवाल, कमेटी सदस्य मोहन सिंह बंगी, जरनैल सिंह करतारपुर, सुरजीत सिंह तुगलवाल, बावा सिंह गुमानपुरा, बीबी गुरिंदर कौर भोलूवाला, गुरनाम सिंह जस्सल, परमजीत सिंह खालसा, शेर सिंह मंडवाला, बाबा गुरप्रीत सिंह रंधावा और मलकीत सिंह गहलाल, सचिव शिरोमणि कमेटी प्रताप सिंह, ओएसडी सतबीर सिंह धामी, उप सचिव सुखमिंदर सिंह, कुलविंदर सिंह रामदास आदि मौजूद थे।
— पंकज शर्मा