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SGPC Election: चाैथी बार एकतरफा जीते धामी, राजनीतिक वजूद खो रही शिअद को मिली ऑक्सीजन
Tue, 29 Oct 2024 11:29 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Oct 2024 11:29 AM IST
सार
शिरोमणि अकाली दल के एसजीपीसी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हरजिंदर सिंह धामी ने चौथी बार अध्यक्ष पद जीत का साबित कर दिया है कि अब भी एसजीपीसी व पंथक क्षेत्रों में बादल दल का पूरा प्रभाव है।
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जानकारी देते हरजिंदर धामी।
- फोटो : संवाद
विस्तार
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष पद का चुनाव एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने जीत लिया है। वह लगातार चाैथी बार प्रधान बने हैं। धामी ने अकाली दल सुधार लहर की उम्मीदवार बीबी जगीर काैर को 74 मतों के अंदर से हराया है। इस जीत से अपना राजनीतिक वजूद खो रही शिरोमणि अकाली दल को ऑक्सीजन मिल गई है।
शिरोमणि अकाली दल के एसजीपीसी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हरजिंदर सिंह धामी ने चौथी बार अध्यक्ष पद जीत का साबित कर दिया है कि अब भी एसजीपीसी व पंथक क्षेत्रों में बादल दल का पूरा प्रभाव है। पंजाब के राजनीतिक क्षेत्र में चाहे पिछले समय के दौरान अकाली दल बादल को काफी झटके मिले और पंजाब की राजनीति में हाशिये पर जाते हुए एक संदेश दे दिया है कि अकाली दल बादल ही सिखों की एकमात्र पंथक पार्टी है।
पंजाब के विधानसभा उपचुनाव में अकाली दल ने यह दावा करते हुए हिस्सा नहीं लिया था कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को तनखाइया घोषित किए जाने के बाद अकाली लीडरशिप वोटरों और आम वर्करों के साथ मेलजोल नहीं रख सकती। इसके चलते अकाली दल ने श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों को मानते हुए चुनाव में हिस्सा नहीं लिया है, लेकिन अपने गढ़ को बचाने के लिए एसजीपीसी के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों के चुनावों में पूरी शक्ति से हिस्सा लिया है। एसजीपीसी का अध्यक्ष पद हासिल करने के बाद बादल दल ने सिख पंथ को संदेश दे दिया है कि अकाली दल बादल के बिना एसजीपीसी के प्रबंधों को न तो कोई सही ढंग से चला सकता है और न ही कोई अन्य ग्रुप सिख कौम में सर्व मान्य पंथक पार्टी है।
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एसजीपीसी के अध्यक्ष समेत कार्यकारिणी के चुनाव जीतने के लिए शिअद ने कई चुनौतियों का समाना करते हुए अपनी सारी शक्ति विजय हासिल करने के लिए लगा दी थी। इसके चलते बादल दल के नेताओं ने खुल कर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी, भाजपा, आरएसएस और कांग्रेस पर विरोधियों की मदद करने के आरोप भी लगाए, जबकि विपक्ष का दावा रहा कि सदस्यों की सत्ताधारी बादल ने बड़े स्तर पर खरीद-फरोख्त भी की है। एसजीपीसी के अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने के बाद शिअद सिख संगत में यह संदेश फैलाने में सफल रहा है कि अब भी अकाली दल बादल के पंजाब के राजनीतिक माहौल में मजबूर होने की अपार संभावनाएं हैं।
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शिरोमणि अकाली दल के एसजीपीसी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हरजिंदर सिंह धामी ने चौथी बार अध्यक्ष पद जीत का साबित कर दिया है कि अब भी एसजीपीसी व पंथक क्षेत्रों में बादल दल का पूरा प्रभाव है। पंजाब के राजनीतिक क्षेत्र में चाहे पिछले समय के दौरान अकाली दल बादल को काफी झटके मिले और पंजाब की राजनीति में हाशिये पर जाते हुए एक संदेश दे दिया है कि अकाली दल बादल ही सिखों की एकमात्र पंथक पार्टी है।
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पंजाब के विधानसभा उपचुनाव में अकाली दल ने यह दावा करते हुए हिस्सा नहीं लिया था कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को तनखाइया घोषित किए जाने के बाद अकाली लीडरशिप वोटरों और आम वर्करों के साथ मेलजोल नहीं रख सकती। इसके चलते अकाली दल ने श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों को मानते हुए चुनाव में हिस्सा नहीं लिया है, लेकिन अपने गढ़ को बचाने के लिए एसजीपीसी के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों के चुनावों में पूरी शक्ति से हिस्सा लिया है। एसजीपीसी का अध्यक्ष पद हासिल करने के बाद बादल दल ने सिख पंथ को संदेश दे दिया है कि अकाली दल बादल के बिना एसजीपीसी के प्रबंधों को न तो कोई सही ढंग से चला सकता है और न ही कोई अन्य ग्रुप सिख कौम में सर्व मान्य पंथक पार्टी है।
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एसजीपीसी के अध्यक्ष समेत कार्यकारिणी के चुनाव जीतने के लिए शिअद ने कई चुनौतियों का समाना करते हुए अपनी सारी शक्ति विजय हासिल करने के लिए लगा दी थी। इसके चलते बादल दल के नेताओं ने खुल कर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी, भाजपा, आरएसएस और कांग्रेस पर विरोधियों की मदद करने के आरोप भी लगाए, जबकि विपक्ष का दावा रहा कि सदस्यों की सत्ताधारी बादल ने बड़े स्तर पर खरीद-फरोख्त भी की है। एसजीपीसी के अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने के बाद शिअद सिख संगत में यह संदेश फैलाने में सफल रहा है कि अब भी अकाली दल बादल के पंजाब के राजनीतिक माहौल में मजबूर होने की अपार संभावनाएं हैं।
एसजीपीसी के मौजूदा कुल 148 सदस्यों में से 142 ने मतदान किया। इनमें से दो वोट रद्द हुए। हरजिंदर सिंह धामी को 107 और बीबी जगीर काैर को 33 मत प्राप्त हुए। चुनावी इलजास शुरू होने से पहले हुकमनामा लिया और अरदास की गई। इसके बाद एसजीपीसी के पूर्व अध्यक्ष किरपाल सिंह बडूंगर ने अध्यक्ष पद के लिए हरजिंदर सिंह धामी के नाम का प्रस्ताव पेश किया, जिसका पूर्व अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल व अरविंदरपाल सिंह ने धामी अनुमोदन किया। दूसरी ओर बीबी जगीर काैर के नाम का प्रस्ताव एसजीपीसी के पूर्व सदस्य अमरीत सिंह ने पेश किया। उनके नाम का समर्थन मिट्ठू सिंह काहणके व अनुमोदन सतिंदर सिंह टोहड़ा ने किया।
रघुजीत सिंह बने सीनियर उपप्रधान
एसजीपीसी अध्यक्ष पद पर हरजिंदर सिंह धामी की जीत के बाद रघुजीत सिंह विर्क को सीनियर उपप्रधान, बलदेव सिंह कलियाण को जूनियर उपप्रधान, और शेर सिंह मंडवाला को महासचिव चुन लिया गया। इसी दौरान एक प्रस्ताव पारित करके कुलवंत सिंह को एसजीपीसी का एक वर्ष के लिए मुख्य सचिव मनोनीत किया है।
पदाधिकारियों के चुनाव के बाद हुई कार्यकारिणी कमेटी के 11 सदस्यों का चुनाव किया गया। इसमें बीबी हरजिंदर कौर, अमरीक सिंह वछोहा, सुरजीत सिंह तुगलवाला, परमजीत सिंह खालसा, सुरजीत सिंह, बलदेव सिंह कायमपुर, दलजीत सिंह भिंडर, सुखहरप्रीत सिंह रोडे, रविंदर सिंह खालसा तथा विपक्ष के दो सदस्यों जसवंत सिंह पडैण और परमजीत सिंह रायपुर को कार्यकारिणी के लिए चुना गया।
पंजाब की माैजूदा सरकार ने मुझे हारने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था, लेकिन पंथ विरोधी ताकत बुरी तरह पराजित हुई है। आप, आरएसएस, भाजपा व कांग्रेस ने सभी तरह के हथकंडे अपनाए, लेकिन सब विफल हुए।-एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, अध्यक्ष
चुनाव परिणाम देखकर लगता है एसजीपीसी के सदस्यों की अंतरात्मा मर चुकी है। दीवार पर स्पष्ट लिखा है कि बेअदबी के दोषी काैन है। फिर भी सदस्यों ने उनके उम्मीदवार को विजयी बना दिया।-बीबी जगीर काैर
रघुजीत सिंह बने सीनियर उपप्रधान
एसजीपीसी अध्यक्ष पद पर हरजिंदर सिंह धामी की जीत के बाद रघुजीत सिंह विर्क को सीनियर उपप्रधान, बलदेव सिंह कलियाण को जूनियर उपप्रधान, और शेर सिंह मंडवाला को महासचिव चुन लिया गया। इसी दौरान एक प्रस्ताव पारित करके कुलवंत सिंह को एसजीपीसी का एक वर्ष के लिए मुख्य सचिव मनोनीत किया है।
पदाधिकारियों के चुनाव के बाद हुई कार्यकारिणी कमेटी के 11 सदस्यों का चुनाव किया गया। इसमें बीबी हरजिंदर कौर, अमरीक सिंह वछोहा, सुरजीत सिंह तुगलवाला, परमजीत सिंह खालसा, सुरजीत सिंह, बलदेव सिंह कायमपुर, दलजीत सिंह भिंडर, सुखहरप्रीत सिंह रोडे, रविंदर सिंह खालसा तथा विपक्ष के दो सदस्यों जसवंत सिंह पडैण और परमजीत सिंह रायपुर को कार्यकारिणी के लिए चुना गया।
पंजाब की माैजूदा सरकार ने मुझे हारने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था, लेकिन पंथ विरोधी ताकत बुरी तरह पराजित हुई है। आप, आरएसएस, भाजपा व कांग्रेस ने सभी तरह के हथकंडे अपनाए, लेकिन सब विफल हुए।-एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, अध्यक्ष
चुनाव परिणाम देखकर लगता है एसजीपीसी के सदस्यों की अंतरात्मा मर चुकी है। दीवार पर स्पष्ट लिखा है कि बेअदबी के दोषी काैन है। फिर भी सदस्यों ने उनके उम्मीदवार को विजयी बना दिया।-बीबी जगीर काैर