{"_id":"62d988f1d46fe25e16785664","slug":"days-passed-in-the-legal-process-itself-the-post-mortem-of-gangsters-could-not-be-done-amritsar-news-pkl4572681177","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानूनी प्रक्रिया में ही बीत गया दिन, नहीं हो पाया गैंगस्टरों का पोस्टमार्टम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानूनी प्रक्रिया में ही बीत गया दिन, नहीं हो पाया गैंगस्टरों का पोस्टमार्टम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर मनप्रीत मनु और जगरूप रूपा के शवों का पोस्टमार्टम वीरवार को नहीं हो पाया। कानूनी प्रक्रिया में ही पूरा दिन बीत गया। शाम को दोनों शव सिविल अस्पताल से गुरु नानक देव अस्पताल की मॉर्चरी में रखवा दिए गए। उम्मीद है शुक्रवार को पोस्टमार्टम किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, शवों का पोस्टमार्टम डॉक्टरों का तीन सदस्यीय बोर्ड करेगा। इसमें दो डॉक्टर मेडिकल कॉलेज के होंगे जबकि एक सिविल अस्पताल का होगा। पोस्टमार्टम की कार्यवाही एसडीएम के मार्गदर्शन में वीडियोग्राफी से की जानी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे दिन अलग अलग एजेंसियां शवों की जांच करती रहीं। फॉरेंसिक सैंपल भी लिए जाते रहे। वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी भी होती रही। वहीं, वहीं दोनों गैंगस्टरों के शवों की पहचान भी अलग अलग लोगों, परिवारों के सदस्यों व नजदीकी संबंधियों की ओर से कराई जाती रही। इस कारण पोस्टमार्टम की प्रक्रिया मुकम्मल नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमृतसर। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर मनप्रीत मनु और जगरूप रूपा के शवों का पोस्टमार्टम वीरवार को नहीं हो पाया। कानूनी प्रक्रिया में ही पूरा दिन बीत गया। शाम को दोनों शव सिविल अस्पताल से गुरु नानक देव अस्पताल की मॉर्चरी में रखवा दिए गए। उम्मीद है शुक्रवार को पोस्टमार्टम किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, शवों का पोस्टमार्टम डॉक्टरों का तीन सदस्यीय बोर्ड करेगा। इसमें दो डॉक्टर मेडिकल कॉलेज के होंगे जबकि एक सिविल अस्पताल का होगा। पोस्टमार्टम की कार्यवाही एसडीएम के मार्गदर्शन में वीडियोग्राफी से की जानी है।
विज्ञापन
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे दिन अलग अलग एजेंसियां शवों की जांच करती रहीं। फॉरेंसिक सैंपल भी लिए जाते रहे। वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी भी होती रही। वहीं, वहीं दोनों गैंगस्टरों के शवों की पहचान भी अलग अलग लोगों, परिवारों के सदस्यों व नजदीकी संबंधियों की ओर से कराई जाती रही। इस कारण पोस्टमार्टम की प्रक्रिया मुकम्मल नहीं हो पाई है।
विज्ञापन