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फर्जी वसीयत के सहारे जमीन हड़पने की कोशिश
ब्यूरो, अमर उजाला/अमृतसर
Updated Thu, 04 Aug 2016 10:03 PM IST
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धोखाधड़ी
- फोटो : dummy picture
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गांव उच्चा में चाचा की मौत के बाद तीन भतीजों ने फर्जी वसीयत के सहारे उसकी जमीन हड़पने की कोशिश की। उन्हीं के चचेरे भाई ने मामले की शिकायत एसएसपी कपूरथला से की। आरोपी तीनों भाइयों और दो गवाहों के खिलाफ धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता के खिलाफ आरोपियों ने पहले चाचा को जहर देकर मारने का आरोप लगाया था, लेकिन पोस्टमार्टम में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई थी।
एसएसपी राजिंदर सिंह को दी शिकायत में बलजिंदर सिंह नंबरदार वासी उच्चा पिंड ने बताया कि उसके पिता शिवदेव सिंह चार भाई थे। उसके चाचा कपूर सिंह ने शादी नहीं की थी और मौत से पहले उनके साथ ही रहता था। चाचा की गांव में 52 कनाल 14 मरले जमीन थी, जिसकी वसीयत 28 जुलाई 2011 को उसके भाइयों के नाम कर गए।
उसने बताया कि जब वह जमीन में खेती करने जाते तो उसके चाचा किशन सिंह के बेटे बलबीर सिंह, जसबीर सिंह, कुलदीप सिंह उनको डराते। उसने शक जताया कि बलबीर सिंह ने उसके मृत चाचा कपूर सिंह की 22 मार्च 2002 तारीख की फर्जी वसीयत बनवा रखी है, जिस पर उनके चाचा के फर्जी हस्ताक्षर हैं।
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एसएसपी ने मामले की जांच एसपी फगवाड़ा को दे दी। जांच में पाया गया कि बलबीर सिंह द्वारा तैयार वसीयत में जिस नंबरदार मेला सिंह की गवाही डाली गई है, वह उन दिनों अमेरिका में था और 2002 में लौटा। जांच में साबित हुआ कि बलबीर सिंह द्वारा तैयार की वसीयत फर्जी है जो उन्होंने जगमोहन सिंह और निर्मल सिंह के साथ सलाह कर साजिशन जायदाद हड़पने की कोशिश में ही तैयार करवाई है। उन्होंने पांचों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश कर दी। एसएसपी के निर्देश पर डीए लीगल की राए के बाद पांचों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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एसएसपी राजिंदर सिंह को दी शिकायत में बलजिंदर सिंह नंबरदार वासी उच्चा पिंड ने बताया कि उसके पिता शिवदेव सिंह चार भाई थे। उसके चाचा कपूर सिंह ने शादी नहीं की थी और मौत से पहले उनके साथ ही रहता था। चाचा की गांव में 52 कनाल 14 मरले जमीन थी, जिसकी वसीयत 28 जुलाई 2011 को उसके भाइयों के नाम कर गए।
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उसने बताया कि जब वह जमीन में खेती करने जाते तो उसके चाचा किशन सिंह के बेटे बलबीर सिंह, जसबीर सिंह, कुलदीप सिंह उनको डराते। उसने शक जताया कि बलबीर सिंह ने उसके मृत चाचा कपूर सिंह की 22 मार्च 2002 तारीख की फर्जी वसीयत बनवा रखी है, जिस पर उनके चाचा के फर्जी हस्ताक्षर हैं।
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एसएसपी ने मामले की जांच एसपी फगवाड़ा को दे दी। जांच में पाया गया कि बलबीर सिंह द्वारा तैयार वसीयत में जिस नंबरदार मेला सिंह की गवाही डाली गई है, वह उन दिनों अमेरिका में था और 2002 में लौटा। जांच में साबित हुआ कि बलबीर सिंह द्वारा तैयार की वसीयत फर्जी है जो उन्होंने जगमोहन सिंह और निर्मल सिंह के साथ सलाह कर साजिशन जायदाद हड़पने की कोशिश में ही तैयार करवाई है। उन्होंने पांचों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश कर दी। एसएसपी के निर्देश पर डीए लीगल की राए के बाद पांचों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।