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एक अन्य नायब तहसीलदार ने बिना आज्ञा लिए अपनी ज्यूरिडिक्शन से बाहर जाकर किया कार्य
Updated Mon, 23 Jul 2018 10:34 PM IST
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एक और नायब तहसीलदार ने ज्यूरीडिक्शन से बाहर जाकर किया कार्य
कोर्ट में माना अभी तक अपने डीसी को इस संबंध में नहीं दी कोई जानकारी
साहनी ने कोर्ट में कहा, डीसी की इजाजत के बिना कहीं भी जाकर काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें
मनन सैनी
गुरदासपुर। कठुआ दुराचार और हत्याकांड के मामले में सोमवार को दो गवाहों की गवाही हुई। इनमें से एक सल्लन के नायब तहसीलदार थे। 13वें गवाह के तौर पर पेश हुए नायब तहसीलदार ने कोर्ट में बताया कि उन्हें दवा का खाली पत्ता देवस्थल के पास मिला था। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या आपकी ज्यूरीडिक्शन कठुआ के रसाना गांव में पड़ती है तो उन्होंने ने मना कर दिया। कहा कि वह अपने तहसीलदार से मौखिक इजाजत लेकर वहां गए थे। इस बारे में बचाव पक्ष के वकील एके साहनी ने बताया कि नायब तहसीलदार ने कोर्ट में माना है कि अभी तक इस बारे में डिप्टी कमिश्नर तक को कोई जानकारी नहीं दी है। साहनी ने पत्रकारों से कहा कि यह दूसरा नायब तहसीलदार है जो बिना किसी अनुमति, बिना लिखित आर्डर के अपने आप वारदात स्थल पर पहुंचे हैं। जबकि कठुआ इलाके के नायब तहसीलदार को पता तक नहीं है। संबंधित इलाके के नायब तहसीलदार को इस केस में क्यों नहीं लगाया गया? बाहर से क्यों तहसीलदार बुलाए गए? यह सब एक षड्यंत्र लगता है। उन्होंने कहा कि कठुआ के डीसी तक को जानकारी देना उचित नहीं समझा गया। 12 जनवरी 2018 से 12 मार्च 2018 तक वहां पर डीसी रोहित थे। उन्हें इस संबंध में नायब तहसीलदार पर कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने प्रशासन से पूछा है कि क्या तहसीलदारों के पास कहीं भी बिना लिखित आर्डर जाकर कार्रवाई का अधिकार है?
साहनी बोले-बिना सूचना फिर पेश हुए दो गवाह
दूसरी ओर डिफेंस पक्ष ने दोबारा जज से निवेदन किया कि सोमवार को पेश हुए दोनों गवाहों के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। क्योंकि जम्मू से यहां उनके आने जाने में साढ़े पांच घंटे लग जाते हैं। उन्होंने जज से अपील की कि बेशक एक दिन पहले ही सही, लेकिन हमें इसकी सूचना दी जाए। एके साहनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही गाइडलाइन जारी कर चुका है कि न्याय करने में जल्दी करना न्याय को दफन करने के समान होता है। फिर हम कोई ज्योतिषी नहीं हैं, जिन्हें पहले से पता चल जाए कि आज कौन सा गवाह पेश होने वाला है। इस तरह हम हर कोशिश करने के बावजूद खुद को अपंग मानते हैं। क्योंकि हमें अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा तथा निष्पक्षता में निभाने से रोका जा रहा है।
बिना सूचना गवाह पेश होने पर आज आ सकता है फैसला
साहनी ने बताया कि जज ने मंगलवार को इस पर अपना फैसला सुनाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर हमारी नहीं सुनी गई तो हमें एक राय बनाकर कड़ा फैसला लेने को मजबूर होना पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे।
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एक और नायब तहसीलदार ने ज्यूरीडिक्शन से बाहर जाकर किया कार्य
कोर्ट में माना अभी तक अपने डीसी को इस संबंध में नहीं दी कोई जानकारी
साहनी ने कोर्ट में कहा, डीसी की इजाजत के बिना कहीं भी जाकर काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें
मनन सैनी
गुरदासपुर। कठुआ दुराचार और हत्याकांड के मामले में सोमवार को दो गवाहों की गवाही हुई। इनमें से एक सल्लन के नायब तहसीलदार थे। 13वें गवाह के तौर पर पेश हुए नायब तहसीलदार ने कोर्ट में बताया कि उन्हें दवा का खाली पत्ता देवस्थल के पास मिला था। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या आपकी ज्यूरीडिक्शन कठुआ के रसाना गांव में पड़ती है तो उन्होंने ने मना कर दिया। कहा कि वह अपने तहसीलदार से मौखिक इजाजत लेकर वहां गए थे। इस बारे में बचाव पक्ष के वकील एके साहनी ने बताया कि नायब तहसीलदार ने कोर्ट में माना है कि अभी तक इस बारे में डिप्टी कमिश्नर तक को कोई जानकारी नहीं दी है। साहनी ने पत्रकारों से कहा कि यह दूसरा नायब तहसीलदार है जो बिना किसी अनुमति, बिना लिखित आर्डर के अपने आप वारदात स्थल पर पहुंचे हैं। जबकि कठुआ इलाके के नायब तहसीलदार को पता तक नहीं है। संबंधित इलाके के नायब तहसीलदार को इस केस में क्यों नहीं लगाया गया? बाहर से क्यों तहसीलदार बुलाए गए? यह सब एक षड्यंत्र लगता है। उन्होंने कहा कि कठुआ के डीसी तक को जानकारी देना उचित नहीं समझा गया। 12 जनवरी 2018 से 12 मार्च 2018 तक वहां पर डीसी रोहित थे। उन्हें इस संबंध में नायब तहसीलदार पर कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने प्रशासन से पूछा है कि क्या तहसीलदारों के पास कहीं भी बिना लिखित आर्डर जाकर कार्रवाई का अधिकार है?
साहनी बोले-बिना सूचना फिर पेश हुए दो गवाह
दूसरी ओर डिफेंस पक्ष ने दोबारा जज से निवेदन किया कि सोमवार को पेश हुए दोनों गवाहों के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। क्योंकि जम्मू से यहां उनके आने जाने में साढ़े पांच घंटे लग जाते हैं। उन्होंने जज से अपील की कि बेशक एक दिन पहले ही सही, लेकिन हमें इसकी सूचना दी जाए। एके साहनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही गाइडलाइन जारी कर चुका है कि न्याय करने में जल्दी करना न्याय को दफन करने के समान होता है। फिर हम कोई ज्योतिषी नहीं हैं, जिन्हें पहले से पता चल जाए कि आज कौन सा गवाह पेश होने वाला है। इस तरह हम हर कोशिश करने के बावजूद खुद को अपंग मानते हैं। क्योंकि हमें अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा तथा निष्पक्षता में निभाने से रोका जा रहा है।
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बिना सूचना गवाह पेश होने पर आज आ सकता है फैसला
साहनी ने बताया कि जज ने मंगलवार को इस पर अपना फैसला सुनाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर हमारी नहीं सुनी गई तो हमें एक राय बनाकर कड़ा फैसला लेने को मजबूर होना पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे।
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