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Amritsar News: सिख हेरिटेज सिंफनी यूएसए के बच्चों ने कीर्तन के माध्यम से दिया गुरमत संगीत को नया आयाम
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। कैलिफोर्निया से सिख हेरिटेज सिंफनी यूएसए की टीम जिसमें 5 से 25 वर्ष की आयु के बच्चे शामिल हैं, इन दिनों भारत में गुरुद्वारों के माध्यम से गुरमत संगीत के प्रचार-प्रसार के माध्यम से एक नई रोशनी फैला रही है। डॉ. गुरनाम सिंह के नेतृत्व में इन बच्चों ने कीर्तन के तकनीकी और आध्यात्मिक, दोनों पहलुओं को प्रस्तुत किया है।
यह जत्था व इस में शामिल बच्चे शनिवार श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह से मिले। इससे पहले यह जत्था दिल्ली के बंगला साहिब, शीशगंज साहिब से लेकर फतेहगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब की यात्रा कर चुका है। उनकी यात्रा का उद्देश्य केवल गायन नहीं बल्कि रागी परंपरा के मूल स्वरूप, राग विद्या और गुरमत संगीत को संरक्षित करना है। यह संस्था सैन जोस, सिल्वरपुर और कैलिफोर्निया के अन्य गुरुद्वारों में गुरमत संगीत का प्रशिक्षण दे रही है। हर रविवार को 2 से 3 घंटे की कक्षा होती है, जिसमें 5 वर्ष से अधिक आयु के बच्चे संगीत सीखते हैं। उनके लिए छोटे आकार के वाद्य यंत्र भी तैयार किए जाते हैं, ताकि वे आराम से अभ्यास कर सकें।
विदेश में रहने वाले सिख बच्चों को यह प्रशिक्षण रागों पर आधारित पद्धति के अनुसार दिया जाता है। छात्रों को राग-आधारित पाठ और गायन के माध्यम से जपजी साहिब से लेकर अकाल उस्तत तक गुरबाणी रचनाएं सिखाई जाती हैं। यह दल न्यूयॉर्क, शिकागो और अन्य स्थानों पर आयोजित संगीत समारोहों में गुरमत रागों का प्रदर्शन करता है। इन बच्चों ने पाश्चात्य स्वरलिपि में 31 रागों की तकनीक में निपुणता प्राप्त कर ली है। इन बच्चों ने गुरु गोबिंद सिंह जी के नाम पर आयोजित कीर्तन प्रतियोगिता में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। इनकी संगीत की प्रसिद्धि के कारण, अमेरिका के कई गुरुद्वारों ने इन्हें नियमित रूप से आमंत्रित किया है। बताया गया कि यह जत्था दरबार साहिब, चीफ खालसा दीवान और दमदमा साहिब विश्वविद्यालय में अपने कार्यक्रम संपन्न कर चुका है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। कैलिफोर्निया से सिख हेरिटेज सिंफनी यूएसए की टीम जिसमें 5 से 25 वर्ष की आयु के बच्चे शामिल हैं, इन दिनों भारत में गुरुद्वारों के माध्यम से गुरमत संगीत के प्रचार-प्रसार के माध्यम से एक नई रोशनी फैला रही है। डॉ. गुरनाम सिंह के नेतृत्व में इन बच्चों ने कीर्तन के तकनीकी और आध्यात्मिक, दोनों पहलुओं को प्रस्तुत किया है।
यह जत्था व इस में शामिल बच्चे शनिवार श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह से मिले। इससे पहले यह जत्था दिल्ली के बंगला साहिब, शीशगंज साहिब से लेकर फतेहगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब की यात्रा कर चुका है। उनकी यात्रा का उद्देश्य केवल गायन नहीं बल्कि रागी परंपरा के मूल स्वरूप, राग विद्या और गुरमत संगीत को संरक्षित करना है। यह संस्था सैन जोस, सिल्वरपुर और कैलिफोर्निया के अन्य गुरुद्वारों में गुरमत संगीत का प्रशिक्षण दे रही है। हर रविवार को 2 से 3 घंटे की कक्षा होती है, जिसमें 5 वर्ष से अधिक आयु के बच्चे संगीत सीखते हैं। उनके लिए छोटे आकार के वाद्य यंत्र भी तैयार किए जाते हैं, ताकि वे आराम से अभ्यास कर सकें।
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विदेश में रहने वाले सिख बच्चों को यह प्रशिक्षण रागों पर आधारित पद्धति के अनुसार दिया जाता है। छात्रों को राग-आधारित पाठ और गायन के माध्यम से जपजी साहिब से लेकर अकाल उस्तत तक गुरबाणी रचनाएं सिखाई जाती हैं। यह दल न्यूयॉर्क, शिकागो और अन्य स्थानों पर आयोजित संगीत समारोहों में गुरमत रागों का प्रदर्शन करता है। इन बच्चों ने पाश्चात्य स्वरलिपि में 31 रागों की तकनीक में निपुणता प्राप्त कर ली है। इन बच्चों ने गुरु गोबिंद सिंह जी के नाम पर आयोजित कीर्तन प्रतियोगिता में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। इनकी संगीत की प्रसिद्धि के कारण, अमेरिका के कई गुरुद्वारों ने इन्हें नियमित रूप से आमंत्रित किया है। बताया गया कि यह जत्था दरबार साहिब, चीफ खालसा दीवान और दमदमा साहिब विश्वविद्यालय में अपने कार्यक्रम संपन्न कर चुका है।
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