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मुख्यमंत्री निजी स्वार्थ के लिए बोलते हैं झूठ : मनप्रीत
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Mon, 18 Jan 2016 08:57 PM IST
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पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब को भंग कर कांग्रेस पार्टी में विलय करने वाली पीपीपी के मुखी मनप्रीत सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री व उनके ताऊ प्रकाश सिंह बादल अपने स्वार्थ के लिए झूठ बोलते हैं। साथ ही वह धार्मिक मामलों में भी हस्तक्षेप करते हैं।
सोमवार को श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे मनप्रीत बादल ने कहा कि धार्मिक मामलों में सीएम की दखलअंदाजी का ही परिणाम है कि सिख कौम मुश्किलों में है। धर्म और राजनीति अलग-अलग होनी चाहिए तभी समाज, धर्म का विकास संभव है लेकिन सीएम, डिप्टी सीएम पर राजनीति हावी है।
मनप्रीत ने कहा कि पीपीपी का कांग्रेस में विलय अचानक हुई घटना नहीं बल्कि इस के लिए काफी समय से कोशिशें चल रही थीं। पीपीपी कई चुनाव कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ भी चुकी है। राहुल गांधी के साथ पार्टी के नेताओं की तीन बैठकें हुई थी।
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इन बैठकों में पीपीपी के 11 सूत्री प्रोग्राम को राहुल गांधी ने पूरी तरह स्वीकार कर लिया तब जाकर दोनों पार्टियों का आपस में विलय हुआ। वह अब कांग्रेस का एजेंडा वर्ष 2017 के चुनाव के लिए लोगों के बीच लेकर जाएंगे। उन्होंने मालवा और दोआबा के मुकाबले माझा को राज्य का गरीब क्षेत्र बताया।
उन्होंने कहा कि माझा के एक लाख युवाओं को 15 हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से नौकरी दी जानी चाहिए। वह तीन हजार करोड़ रुपये माझा में निवेश करवाने के लिए कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह और पार्टी हाई कमान को देंगे। उन्होंने कहा कि कैप्टन के हाथों में पंजाब का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित है। उनके साथी गुरप्रीत भट्टी भी जल्द कांग्रेस में आ जाएंगे।
इस अवसर पर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष शहरी व ग्रामीण रजीव भगत, गुरजीत सिंह औजला , पूर्व मंत्री सरदूल सिंह बुंडाला , डा राज कुमार वेरका, तरसेम सिंह डीसी, गगनदीप सिंह, हरप्रताप सिंह अजनाला, इंदरजीत बासरके , सुनील दत्ती , मनदीप मन्ना, कर्मजीत सिंह रिंटू मौजूद थे।
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सोमवार को श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे मनप्रीत बादल ने कहा कि धार्मिक मामलों में सीएम की दखलअंदाजी का ही परिणाम है कि सिख कौम मुश्किलों में है। धर्म और राजनीति अलग-अलग होनी चाहिए तभी समाज, धर्म का विकास संभव है लेकिन सीएम, डिप्टी सीएम पर राजनीति हावी है।
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मनप्रीत ने कहा कि पीपीपी का कांग्रेस में विलय अचानक हुई घटना नहीं बल्कि इस के लिए काफी समय से कोशिशें चल रही थीं। पीपीपी कई चुनाव कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ भी चुकी है। राहुल गांधी के साथ पार्टी के नेताओं की तीन बैठकें हुई थी।
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इन बैठकों में पीपीपी के 11 सूत्री प्रोग्राम को राहुल गांधी ने पूरी तरह स्वीकार कर लिया तब जाकर दोनों पार्टियों का आपस में विलय हुआ। वह अब कांग्रेस का एजेंडा वर्ष 2017 के चुनाव के लिए लोगों के बीच लेकर जाएंगे। उन्होंने मालवा और दोआबा के मुकाबले माझा को राज्य का गरीब क्षेत्र बताया।
उन्होंने कहा कि माझा के एक लाख युवाओं को 15 हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से नौकरी दी जानी चाहिए। वह तीन हजार करोड़ रुपये माझा में निवेश करवाने के लिए कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह और पार्टी हाई कमान को देंगे। उन्होंने कहा कि कैप्टन के हाथों में पंजाब का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित है। उनके साथी गुरप्रीत भट्टी भी जल्द कांग्रेस में आ जाएंगे।
इस अवसर पर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष शहरी व ग्रामीण रजीव भगत, गुरजीत सिंह औजला , पूर्व मंत्री सरदूल सिंह बुंडाला , डा राज कुमार वेरका, तरसेम सिंह डीसी, गगनदीप सिंह, हरप्रताप सिंह अजनाला, इंदरजीत बासरके , सुनील दत्ती , मनदीप मन्ना, कर्मजीत सिंह रिंटू मौजूद थे।