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खजाना डियोड़ी में लगे गोलियों के निशानों को सरंक्षित करेगी एसजीपीसी
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सचखंड श्री हरमंदिर साहिब की पावन परिक्रमा में स्थित खजाना ड्योढ़ी की कार सेवा शुरू हो गई है। ऑपरेशन ब्लू स्टार के 35 साल बीत जाने के बाद एसजीपीसी ने इस ड्योढ़ी की कार सेवा संत बाबा कश्मीर सिंह भूरी वालों को सौंपी है। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान यह खजाना ड्योढ़ी गोलियों से छलनी हो गई थी। एसजीपीसी ने इस ड्योढ़ी में लगे गोलियों के निशान संरक्षित किए हैं। देश-दुनिया भर से श्री दरबार साहिब में माथा टेकने के लिए आने वाले अति महत्वपूर्ण लोगों को इस ड्योढ़ी में संरक्षित गोलियों के निशान दिखाकर एसजीपीसी द्वारा तत्कालीन सरकार के जुल्म के बारे में जानकारी दी जाती रही है।
अरदास के बाद शुरू हुई कार सेवा के बाद एसजीपीसी के अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार की याद दिलाती ड्योढ़ी की सुरक्षा के लिए स्टील के फ्रेम लगाए जाएंगे। गोलियों के निशान संरक्षित रखने के लिए उन स्थानों में स्टील के फ्रेम लगाकर उनके ऊपर शीशा लगाया जाएगा। ड्योढ़ी की दीवारों को पानी से बचाया जाएगा। सिखों की नई पीढ़ी को ऑपरेशन ब्लू स्टार के बारे में जानकारी देने के लिए एसजीपीसी प्रयास जारी रखेगी।
इस अवसर पर एसजीपीसी के चीफ सेक्रेटरी डॉ. रूप सिंह ने कहा कि 1984 को सिख कौम कभी नहीं भूल सकती। दर्शनी ड्योढ़ी पर लगाए जाने वाले फ्रेम व शीशे को लगाने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएगी। इस अवसर पर एसजीपीसी सदस्य भाई राजिंदर सिंह मेहता, भगवंत सिंह स्यालका, बावा सिंह गुमानपुरा, मैनेजर जसविंदर सिंह दीनपुर, बाबा हरभजन सिंह और बाबा राम सिंह मौजूद थे।
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अरदास के बाद शुरू हुई कार सेवा के बाद एसजीपीसी के अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार की याद दिलाती ड्योढ़ी की सुरक्षा के लिए स्टील के फ्रेम लगाए जाएंगे। गोलियों के निशान संरक्षित रखने के लिए उन स्थानों में स्टील के फ्रेम लगाकर उनके ऊपर शीशा लगाया जाएगा। ड्योढ़ी की दीवारों को पानी से बचाया जाएगा। सिखों की नई पीढ़ी को ऑपरेशन ब्लू स्टार के बारे में जानकारी देने के लिए एसजीपीसी प्रयास जारी रखेगी।
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इस अवसर पर एसजीपीसी के चीफ सेक्रेटरी डॉ. रूप सिंह ने कहा कि 1984 को सिख कौम कभी नहीं भूल सकती। दर्शनी ड्योढ़ी पर लगाए जाने वाले फ्रेम व शीशे को लगाने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएगी। इस अवसर पर एसजीपीसी सदस्य भाई राजिंदर सिंह मेहता, भगवंत सिंह स्यालका, बावा सिंह गुमानपुरा, मैनेजर जसविंदर सिंह दीनपुर, बाबा हरभजन सिंह और बाबा राम सिंह मौजूद थे।
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