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समाजसेवी बृज बेदी पंचतत्व में विलीन
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Mon, 01 Feb 2016 10:17 PM IST
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भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी के पति बृज बेदी सोमवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका अंतिम संस्कार अमृतसर में श्री दुर्ग्याणा शिव पुरी में किया गया। बेदी के अंतिम दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में उनके करीबी और रिश्तेदार पहुंचे। बेदी की रविवार को गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वह कई दिन से बीमार थे।
बृज बेदी का अमृतसर में समाज सेवक के रूप में बड़ा नाम था। वह साफ छवि के व्यक्ति थे और अपनी किसी भी बात को कहने में संकोच नहीं करते थे। 1960 में पैदा हुए बेदी ने इतिहास में मास्टर डिग्री पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से की थी। वह टेनिस के खिलाड़ी थे।
टेनिस के खेल के दौरान उनकी मुलाकात किरण से हुई। उनकी दोस्ती प्यार में बदली और 1971 में उन्होंने मंदिर में शादी कर ली। 1975 में किरण ने बेटी सानिया को जन्म दिया। बाद में किरण आईपीएस बन दिल्ली चली गईं। बेदी किरण और सानिया के संपर्क में हमेशा रहते थे। बेदी ने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में डिग्री ली थी। फोटोग्राफी, समाज सेवा और मॉडलिंग के वह शौकीन थे।
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कुछ समय उन्होंने अपने गांव जिला गुरदासपुर तुंग अलवाला में खेती भी की। उन्होंने अमृतसर के छेहरटा इलाके में टैक्सटाइल का एक प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित किया। अंतिम समय तक वह इस यूनिट को चलाते थे। उन्होंने अमृतसर में नशे के सेवन के लिए मशहूर इलाके मकबूल पुरा में नशे से मरने वालों की विधवाओं और बच्चों के लिए एक स्कूल भी रिटायर अध्यापक अजीत सिंह की सहायता से शुरू किया। इसमें मुफ्त शिक्षा दी जाती है। सारा खर्च बेदी ही उठाते थे। शहर में ट्रैफिक कंट्रोल के लिए और अश्लील पोस्टरों के खिलाफ भी अभियान भी शुरू किया गया था।
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बृज बेदी का अमृतसर में समाज सेवक के रूप में बड़ा नाम था। वह साफ छवि के व्यक्ति थे और अपनी किसी भी बात को कहने में संकोच नहीं करते थे। 1960 में पैदा हुए बेदी ने इतिहास में मास्टर डिग्री पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से की थी। वह टेनिस के खिलाड़ी थे।
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टेनिस के खेल के दौरान उनकी मुलाकात किरण से हुई। उनकी दोस्ती प्यार में बदली और 1971 में उन्होंने मंदिर में शादी कर ली। 1975 में किरण ने बेटी सानिया को जन्म दिया। बाद में किरण आईपीएस बन दिल्ली चली गईं। बेदी किरण और सानिया के संपर्क में हमेशा रहते थे। बेदी ने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में डिग्री ली थी। फोटोग्राफी, समाज सेवा और मॉडलिंग के वह शौकीन थे।
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कुछ समय उन्होंने अपने गांव जिला गुरदासपुर तुंग अलवाला में खेती भी की। उन्होंने अमृतसर के छेहरटा इलाके में टैक्सटाइल का एक प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित किया। अंतिम समय तक वह इस यूनिट को चलाते थे। उन्होंने अमृतसर में नशे के सेवन के लिए मशहूर इलाके मकबूल पुरा में नशे से मरने वालों की विधवाओं और बच्चों के लिए एक स्कूल भी रिटायर अध्यापक अजीत सिंह की सहायता से शुरू किया। इसमें मुफ्त शिक्षा दी जाती है। सारा खर्च बेदी ही उठाते थे। शहर में ट्रैफिक कंट्रोल के लिए और अश्लील पोस्टरों के खिलाफ भी अभियान भी शुरू किया गया था।