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अपने वतन लौटा 'बॉर्डर': अटारी-वाघा सीमा से हुआ रवाना, पाकिस्तान जाने से पहले पिता ने लगाया जय श्री राम का जयघोष

Fri, 10 Dec 2021 05:13 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 10 Dec 2021 05:13 PM IST
सार

पाकिस्तान का बालक राम अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दो दिन पहले दिल्ली में पाकिस्तानी एबेंसी में पहुंचा था। वहां भाजपा नेता अनुज भंडारी के प्रयासों से इस नन्हे बॉर्डर और उसके पूरे परिवार को एबेंसी में भरपूर प्यार मिला।

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Born on Attari border, Child 'Border' returned to Pakistan with his parents
बॉर्डर अपने माता पिता के साथ पाकिस्तान लौटने से पहले। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

विस्तार

भारत की अटारी सीमा पर जन्मा 'बॉर्डर' शुक्रवार को अपने माता-पिता के साथ पाकिस्तान लौट गया। तीन दिन पहले अटारी सीमा लांघ कर वतन लौटने वाले 93 पाकिस्तानी हिंदू नागरिकों के साथ बालक राम अपनी पत्नी नीबो बाई और पांच बच्चों के साथ नहीं जा पाया था। वतन लौटने में बॉर्डर का भारत में जन्म होना आड़े आया था।

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भाजपा नेता अनुज भंडारी के प्रयासों के बाद दो दिनों में ही बच्चे का नाम नन्हे बॉर्डर की माता के पासपोर्ट पर चढ़ गया और शुक्रवार को यह पाकिस्तानी हिंदू परिवार अपने वतन लौट गया। अटारी-वाघा के बीच जीरो लाइन पार करने से पहले नन्हे बॉर्डर के पिता बालक राम ने जय श्री राम का जयघोष किया। इससे पहले इस पाकिस्तानी परिवार के सदस्यों का कोविड टेस्ट किया गया। 
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बालक राम अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दो दिन पहले दिल्ली में पाकिस्तानी एबेंसी में पहुंचा था। वहां भाजपा नेता अनुज भंडारी के प्रयासों से इस नन्हे बॉर्डर और उसके पूरे परिवार को एबेंसी में भरपूर प्यार मिला। एंबेसी के एक कर्मचारी ने नन्हे बॉर्डर को 10 हजार रुपये का शगुन भी डाला और भाजपा को इसके लिए धन्यवाद भी किया। बालक राम अपने नन्हे बॉर्डर का नाम अपनी पत्नी नीबो बाई के पासपोर्ट पर चढ़वाकर शुक्रवार सुबह करीब छह बजे अमृतसर पहुंचा था। 
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भाजपा नेता भंडारी ने इनके अटारी पहुंचने की व्यवस्था की। वहां कोविड जांच करवाने के बाद इमीग्रेशन और कस्टम करवाया। इसके बाद यह पाकिस्तानी हिंदू परिवार अटारी-वाघा सीमा पर जीरो लाइन लांघ कर अपने वतन लौट गया।


पाकिस्तान जाने से पहले बालक राम ने कहा कि अटारी गांव में रहते हुए लोगों के प्यार को कभी भुला नहीं पाएंगे। अगर गांव के लोग सहयोग नहीं करते, तो शायद इतने दिन बिना पैसे के बिताना उनके लिए बहुत मुश्किल होता। भाजपा नेता अनुज भंडारी ने कहा कि जाने से पहले सरहदी लोक सेवा समिति की ओर से इस परिवार को बर्तन, खाने पीने का सामान व कुछ पैसे भी दिए गए, ताकि पाकिस्तान पहुंचने के बाद वहां उन्हें कोई दिक्कत पेश नहीं आए।
 

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