पुणे की 90 वर्षीय रीना वर्मा छिब्बर की अपने पैतृक गांव की गलियों में पहुंचने की मुराद आखिरकार 75 साल बाद पूरी हो गई। रीना ज्वाइंट चेक पोस्ट अटारी से पाकिस्तान रवाना हो गईं। सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर उन्होंने पैतृक घर जाने की इच्छा जताई थी। इसके बाद उनकी एक पाकिस्तानी नागरिक और वहां की मंत्री हिना रब्बानी ने मदद की। पाक रवाना होने से पहले बुजुर्ग महिला की आंखों में गजब की चमक देखी गई। पाकिस्तान सरकार ने सद्भावना के चलते उन्हें पाकिस्तान का तीन माह का वीजा दिया। महिला ने पहले भी पाकिस्तान जाने की इजाजत पाकिस्तान उच्चायोग से मांगी थी और वीजा का आवेदन किया था। लेकिन भारत-पाक के ठंडे रिश्तों के चलते उन्हें इजाजत नहीं मिल सकी थी।
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वाघा-अटारी बॉर्डर
- फोटो : सोशल मीडिया
वे शनिवार को जेसीपी अटारी जीरो लाइन पार कर अपने बचपन की गलियों में पहुंचीं। पुणे निवासी बुजुर्ग रीना वर्मा ने बताया कि उनका जन्म रावलपिंडी (पाकिस्तान) में हुआ था और उनका घर देवी कॉलेज रोड पर था। वहीं मॉडर्न स्कूल में शिक्षा हासिल की। उनके भाई और बहन ने भी उसी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की।
अटारी सीमा के रास्ते पाकिस्तान रवाना होने से पहले उन्होंने बताया कि उनके पिता स्वतंत्र विचारों के थे। उनके घर मुस्लिम दोस्तों का अक्सर आना जाना होता था। 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद उन्हें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। उन्होंने बताया कि अब वह तीन माह के पाकिस्तान प्रवास के दौरान अपनी बचपन की यादों को ताजा करेंगी।
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हिना रब्बानी
- फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
उनकी कोशिश होगी कि वह रावलपिंडी में अपने घर पहुंचकर बचपन की यादों को ताजा करते हुए पुराने दोस्तों को ढूंढकर उनसे मिलने का प्रयास करेंगी। इससे पहले उन्होंने 1965 में भी पाकिस्तान के वीजा के लिए आवेदन किया था लेकिन तब दोनों देशों के बीच युद्ध के हालात के कारण उन्हें वहां जाने की इजाजत नहीं मिली थी।
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रीना वर्मा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बुजुर्ग रीना वर्मा ने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट अपलोड कर अपने पैतृक घर जाने की इच्छा जाहिर की थी। जिसे देखने के बाद पाकिस्तानी नागरिक सज्जाद हैदर ने उनसे संपर्क किया। उनके कहने पर सज्जाद ने रावलपिंडी स्थित उनके आवास की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया के जरिये उन्हें भेजी। इसके कुछ समय बाद उनका संपर्क पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी से हुआ तो उनके प्रयासों से उनका पाकिस्तान जाने का सपना सच हो सका।