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693 भारतीय तीन माह बाद 23 जून को पहुंचेंगे वतन
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कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए भारत-पाकिस्तान सरकारों दोनों देशों को विभाजित करती अटारी-वाघा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थापित एंट्री गेट बंद करने के बाद पाकिस्तान में फंसे 693 भारतीय नागरिक तीन माह बाद 23 जून को अटारी सीमा के रास्ते वतन पहुंचेंगे। पाकिस्तान के कई शहरों में फंसे इन भारतीयों को वतन भेजने के लिए इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है, जिसमें मांग की गई है कि पाकिस्तान में फंसे 693 भारतीयों को वतन भेजने के लिए 23 जून को वाघा सीमा के गेट खोले जाएं। इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी आनंद अखनूरी ने पाकिस्तान की सरकार से आग्रह किया है कि इन भारतीयों को वाघा सीमा तक पहुंचाने के लिए प्रबंध किए जाएं। पाकिस्तान से वतन पहुंचने वाले सभी भारतीयों को 14 दिन क्वारंटीन केंद्रों में रहना होगा।
पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा साहिबान के दर्शन के लिए गए अमृतसर के एक बुजुर्ग दंपति के बेटे कमलजीत सिंह ने कहा कि उनको इस बात की जानकारी मिली है की उनके माता-पिता 23 जून को वतन पहुंच रहे हैं। पूरा परिवार उनके घर पहुंचने का इंतजार कर रहा है। उनके पिता सतबीर सिंह व माता जसजीत कौर की दवा खत्म हुए कई दिन हो चुके हैं। पाकिस्तान में उनको दवा मिली नहीं। माता-पिता की सेहत को लेकर परिवार चिंता में है।
वतन लौटने वालों में जम्मू -कश्मीर के 80 मेडिकल के विद्यार्थी भी हैं, जो पाकिस्तान के कई मेडिकल कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अपने रिश्तेदारों को मिलने गए महाराष्ट्र, गुजरात व राजस्थान के लोग भी इसमें शामिल हैं।
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पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा साहिबान के दर्शन के लिए गए अमृतसर के एक बुजुर्ग दंपति के बेटे कमलजीत सिंह ने कहा कि उनको इस बात की जानकारी मिली है की उनके माता-पिता 23 जून को वतन पहुंच रहे हैं। पूरा परिवार उनके घर पहुंचने का इंतजार कर रहा है। उनके पिता सतबीर सिंह व माता जसजीत कौर की दवा खत्म हुए कई दिन हो चुके हैं। पाकिस्तान में उनको दवा मिली नहीं। माता-पिता की सेहत को लेकर परिवार चिंता में है।
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वतन लौटने वालों में जम्मू -कश्मीर के 80 मेडिकल के विद्यार्थी भी हैं, जो पाकिस्तान के कई मेडिकल कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अपने रिश्तेदारों को मिलने गए महाराष्ट्र, गुजरात व राजस्थान के लोग भी इसमें शामिल हैं।
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