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मौत के 56 दिन बाद भारत पहुंचा शव
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परिवार को आर्थिक तंगी से निकालने के लिए दुबई गए रइया के गांव हसपुर निवासी रणजीत सिंह की दुबई में मौत हो गई। करीब 56 दिन पहले मौत होने के बाद रणजीत सिंह का शव भारत लाया गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे उसका शव भारत ला सकें।
पीड़ित परिवार ने सरबत का भला ट्रस्ट चैरिटेबल ट्रस्ट के सरपरस्त डॉ. एसपी सिंह ओबराए से संपर्क किया। ट्रस्ट के प्रयासों से रणजीत सिंह शव रविवार को दुबई से भारत लाया गया।
डॉ. एसपी सिंह ओबराए ने बताया कि रणजीत सिंह 20 साल पहले रोजगार के लिए दुबई गया था। करीब एक वर्ष पहले दुबई में अचानक रणजीत की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद वह पंजाब लौट गया। परिवार के मुताबिक उसने पंजाब में लंबे समय तक इलाज करवाया। इससे परिवार आर्थिक तौर पर टूट गया और रणजीत एक बार फिर रणजीत दुबई चला गया। इस बार वह विजिटर वीजा पर दुबई गया था।
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ट्रस्ट के प्रतिनिधि ने बताया कि दुबई में काफी प्रयासों के बाद भी रणजीत को पक्का काम नहीं मिला। इस दौरान ही उसकी माता की मौत हो गई। इन सबके कारण उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई और अंत में मौत हो गई।
इसके बाद भारतीय दूतावास के सहयोग और ट्रस्ट के निजी सचिव बलदीप सिंह चाहल ने कागजी कार्रवाई मुकम्मल करवाकर रविवार को शव को सुबह भारत लाकर परिजनों को सौंप दिया।
बता दें कि ट्रस्ट अब तक 245 लोगों के शव भारत पहुंचा चुका है। परिजनों ने ट्रस्ट का धन्यवाद किया है।
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पीड़ित परिवार ने सरबत का भला ट्रस्ट चैरिटेबल ट्रस्ट के सरपरस्त डॉ. एसपी सिंह ओबराए से संपर्क किया। ट्रस्ट के प्रयासों से रणजीत सिंह शव रविवार को दुबई से भारत लाया गया।
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डॉ. एसपी सिंह ओबराए ने बताया कि रणजीत सिंह 20 साल पहले रोजगार के लिए दुबई गया था। करीब एक वर्ष पहले दुबई में अचानक रणजीत की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद वह पंजाब लौट गया। परिवार के मुताबिक उसने पंजाब में लंबे समय तक इलाज करवाया। इससे परिवार आर्थिक तौर पर टूट गया और रणजीत एक बार फिर रणजीत दुबई चला गया। इस बार वह विजिटर वीजा पर दुबई गया था।
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ट्रस्ट के प्रतिनिधि ने बताया कि दुबई में काफी प्रयासों के बाद भी रणजीत को पक्का काम नहीं मिला। इस दौरान ही उसकी माता की मौत हो गई। इन सबके कारण उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई और अंत में मौत हो गई।
इसके बाद भारतीय दूतावास के सहयोग और ट्रस्ट के निजी सचिव बलदीप सिंह चाहल ने कागजी कार्रवाई मुकम्मल करवाकर रविवार को शव को सुबह भारत लाकर परिजनों को सौंप दिया।
बता दें कि ट्रस्ट अब तक 245 लोगों के शव भारत पहुंचा चुका है। परिजनों ने ट्रस्ट का धन्यवाद किया है।