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परिजनों ने लगाया आरोप , सिविल अस्पताल में डाक्टर की कथित लापरवाही के चलते बच्चे की मां के पेट में मृत्यु
Updated Mon, 23 Apr 2018 10:52 PM IST
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गर्भस्थ शिशु की मौत, डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप
पीड़ित परिवार ने सिविल सर्जन कार्यालय सामने की नारेबाजी
जिलाधीश गुरदासपुर को भी की शिकायत
जिलाधीश ने सिविल सर्जन को जांच करके रिपोर्ट देने का दिया आदेश
गुरदासपुर।
स्थानीय सिविल अस्पताल बबरी में तैनात महिला डाक्टर पर एक व्यक्ति ने परिवार सहित कथित तौर पर लापरवाही का आरोप लगा है। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि डाक्टर के न आने के कारण उनकी पत्नी के पेट में ही बच्चे की मृत्यु हो र्गई। इस संबंध में परिवार ने सिविल सर्जन कार्यालय के सामने नारेबाजी की और जिलाधीश को भी शिकायत की। जिलाधीश ने इस संबंधी सिविल सर्जन को मामले की जांच करके तुरंत रिपोर्ट देने का आदेश दिया। हालांकि महिला डाक्टर का कहना है कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई है। बच्चे की हालत ठीक न होने के चलते पहले ही मरीज को अमृतसर रेफर कर दिया गया था।
पूरी रात से सुबह 11 बजे तक डॉक्टर ने नहीं किया चेकअप
जानकारी के अनुसार दीपक तेजा पुत्र जोहन मसीह निवासी गुरदासपुर ने परिवार सहित सिविल सर्जन कार्यालय के सामने सोमवार को विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी पत्नी रिबका का डिलीवरी केस था। उन्होंने 21 अप्रैल 2018 को करीब रात 10:30 बजे सिविल अस्पताल बबरी में रिबका को दाखिल कराया, जो उस समय ठीक हालत में थी। वहां स्टाफ नर्स सुखजीत उपस्थित थी, जिसने केस के संबंध में गायनेकोलोजिस्ट डाक्टर को सूचित किया। स्टाफ नर्स सुखजीत कौर ने चेकअप के बाद कहा कि जच्चा व बच्चा ठीक है। स्टाफ नर्स ने कहा कि 22 अप्रैल 2018 को शाम 8 बजे डाक्टर चेकअप के लिए आएंगे लेकिन डॉ. नहीं पहुंचीं। सुबह फिर ड्यूटी पर पहुंची स्टाफ नर्स मनजीत कौर ने कहा कि जच्चा और बच्चा ठीक हैं और महिला डाक्टर आने वाले हैं। इसके बाद उनके फोन करने पर भी डाक्टर 11 बजे तक अस्पताल नहीं पहुंचे। जब हमने डाक्टर के संबंध में पूछताछ की तो पता चला कि रात सुबह 11 बजे तक कोई डाक्टर रोगी का चेकअप करने नहीं पहुंचा। फिर स्टाफ नर्स ने डाक्टर के साथ फोन पर बात की और अपने तौर पर रोगी को अमृतसर रेफर कर दिया। उसने कहा कि बच्चे की धड़कन नहीं चल रही। स्टाफ नर्स मनजीत कौर ने 108 नंबर पर फोन करके एंबुलेंस को बुलाई, जिस पर हमने रोगी को गुरु नानक अस्पताल बेबे नानकी वार्ड अमृतसर में दाखिल कराया। वहां डाक्टर ने चेकअप के बाद कहा कि बच्चे की धडकन नहीं चल रही है, स्कैन करवाएं। स्कैन में पाया कि बच्चे की पेट में ही मौत हो चुकी है। बाद में अमृतसर में डाक्टरों ने ऑपरेशन से बच्चे को निकाला और मां की जान बचाई।
डीसी से कानूनी कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि डाक्टर की लापरवाही कारण बच्चे की मौत हुई है। उन्होंने मांग की कि डाक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवार ने जिलाधीश को शिकायत पत्र देकर इंसाफ की मांग की, जिस पर जिलाधीश ने जांच के लिए सिविल सर्जन को प्रार्थनापत्र मार्क कर दिया है और सारी जांच करने के बाद रिपोर्ट देने का आदेश जारी किया।
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डॉक्टर बोलीं-मैं ऑन कॉल ड्यूटी पर थी
इस संबंध में जब डाक्टर से बात की तो उन्होंने कहा कि मरीज को पानी की शिकायत के चलते दाखिल किया गया और मरीज की डिलीवरी डेट 22 मई थी। केवल एक ही गायनेकोलोजिस्ट पूरे अस्पताल में है और वह ऑन कॉल ड्यूटी पर थीं। उन्होंने कहा कि वह नवंबर मसे अकेली काम कर रही हैं। जब हमें पता चला कि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है तुरंत उसे रेफर कर दिया। जिसका कारण अस्पताल में रविवार को स्कैनिंग मौजूद नहीं थी। उन्होंने कहा कि फिर भी वह जब अस्पताल पहुंचीं तब तक परिवार वाले अमृतसर जा चुके थे। उन्होंने आरोपों को खारिज किया है।
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पीड़ित परिवार ने सिविल सर्जन कार्यालय सामने की नारेबाजी
जिलाधीश गुरदासपुर को भी की शिकायत
जिलाधीश ने सिविल सर्जन को जांच करके रिपोर्ट देने का दिया आदेश
गुरदासपुर।
स्थानीय सिविल अस्पताल बबरी में तैनात महिला डाक्टर पर एक व्यक्ति ने परिवार सहित कथित तौर पर लापरवाही का आरोप लगा है। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि डाक्टर के न आने के कारण उनकी पत्नी के पेट में ही बच्चे की मृत्यु हो र्गई। इस संबंध में परिवार ने सिविल सर्जन कार्यालय के सामने नारेबाजी की और जिलाधीश को भी शिकायत की। जिलाधीश ने इस संबंधी सिविल सर्जन को मामले की जांच करके तुरंत रिपोर्ट देने का आदेश दिया। हालांकि महिला डाक्टर का कहना है कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई है। बच्चे की हालत ठीक न होने के चलते पहले ही मरीज को अमृतसर रेफर कर दिया गया था।
पूरी रात से सुबह 11 बजे तक डॉक्टर ने नहीं किया चेकअप
जानकारी के अनुसार दीपक तेजा पुत्र जोहन मसीह निवासी गुरदासपुर ने परिवार सहित सिविल सर्जन कार्यालय के सामने सोमवार को विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी पत्नी रिबका का डिलीवरी केस था। उन्होंने 21 अप्रैल 2018 को करीब रात 10:30 बजे सिविल अस्पताल बबरी में रिबका को दाखिल कराया, जो उस समय ठीक हालत में थी। वहां स्टाफ नर्स सुखजीत उपस्थित थी, जिसने केस के संबंध में गायनेकोलोजिस्ट डाक्टर को सूचित किया। स्टाफ नर्स सुखजीत कौर ने चेकअप के बाद कहा कि जच्चा व बच्चा ठीक है। स्टाफ नर्स ने कहा कि 22 अप्रैल 2018 को शाम 8 बजे डाक्टर चेकअप के लिए आएंगे लेकिन डॉ. नहीं पहुंचीं। सुबह फिर ड्यूटी पर पहुंची स्टाफ नर्स मनजीत कौर ने कहा कि जच्चा और बच्चा ठीक हैं और महिला डाक्टर आने वाले हैं। इसके बाद उनके फोन करने पर भी डाक्टर 11 बजे तक अस्पताल नहीं पहुंचे। जब हमने डाक्टर के संबंध में पूछताछ की तो पता चला कि रात सुबह 11 बजे तक कोई डाक्टर रोगी का चेकअप करने नहीं पहुंचा। फिर स्टाफ नर्स ने डाक्टर के साथ फोन पर बात की और अपने तौर पर रोगी को अमृतसर रेफर कर दिया। उसने कहा कि बच्चे की धड़कन नहीं चल रही। स्टाफ नर्स मनजीत कौर ने 108 नंबर पर फोन करके एंबुलेंस को बुलाई, जिस पर हमने रोगी को गुरु नानक अस्पताल बेबे नानकी वार्ड अमृतसर में दाखिल कराया। वहां डाक्टर ने चेकअप के बाद कहा कि बच्चे की धडकन नहीं चल रही है, स्कैन करवाएं। स्कैन में पाया कि बच्चे की पेट में ही मौत हो चुकी है। बाद में अमृतसर में डाक्टरों ने ऑपरेशन से बच्चे को निकाला और मां की जान बचाई।
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डीसी से कानूनी कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि डाक्टर की लापरवाही कारण बच्चे की मौत हुई है। उन्होंने मांग की कि डाक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवार ने जिलाधीश को शिकायत पत्र देकर इंसाफ की मांग की, जिस पर जिलाधीश ने जांच के लिए सिविल सर्जन को प्रार्थनापत्र मार्क कर दिया है और सारी जांच करने के बाद रिपोर्ट देने का आदेश जारी किया।
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डॉक्टर बोलीं-मैं ऑन कॉल ड्यूटी पर थी
इस संबंध में जब डाक्टर से बात की तो उन्होंने कहा कि मरीज को पानी की शिकायत के चलते दाखिल किया गया और मरीज की डिलीवरी डेट 22 मई थी। केवल एक ही गायनेकोलोजिस्ट पूरे अस्पताल में है और वह ऑन कॉल ड्यूटी पर थीं। उन्होंने कहा कि वह नवंबर मसे अकेली काम कर रही हैं। जब हमें पता चला कि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है तुरंत उसे रेफर कर दिया। जिसका कारण अस्पताल में रविवार को स्कैनिंग मौजूद नहीं थी। उन्होंने कहा कि फिर भी वह जब अस्पताल पहुंचीं तब तक परिवार वाले अमृतसर जा चुके थे। उन्होंने आरोपों को खारिज किया है।