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दलित प्रर्दशनकरियों के विरोध में उतरे शिव सेना पंजाब के संगठन मंत्र
Updated Mon, 02 Apr 2018 11:09 PM IST
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‘दलित प्रदर्शनकारियों का विरोध सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हनन’
गुरदासपुर। शिव सेना पंजाब के संगठन मंत्री प्रदीप शर्मा ने अपने सदस्यों के साथ मिलकर बयान जारी किया कि दलित प्रदर्शनकारियों का विरोध सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हनन है, जो बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि पुलिस की शह पर प्रदर्शनकारियों ने शहर में उत्पात मचाया है, जो गलत है। उन्होंने बताया कि रविवार रात को सभी संगठनों और दलित वर्ग को पुलिस ने साफ कह दिया था कि बाजार में प्रदर्शन केवल साढ़े 12 बजे तक कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें पूरा रूट प्लॉन बनाकर दिया गया था। वह भी दलित प्रदर्शनकारियों ने बदल कर साढ़े बारह बजे के बाद खुली दुकानों को जबरन पुलिस की मौजूदगी में बंद करवाया। वहीं इसमें दुकानदारों को सुरक्षा देना पुलिस का कर्तव्य था। लेकिन पुलिस खुद दुकानें बंद करवाती नजर आई। इसके बाद जब प्रदर्शन खत्म हो गया, उसके बाद भी यही कहा गया कि हो सकता है कि प्रदर्शनकारी दोबारा वापस आ सकते हैं, इसलिए अपनी दुकानें बंद ही रखी जाए। जो सरासर अन्याय और दुकानदारों को डराना था। इसलिए दुकानदारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की बनती थी। वहीं पुलिस ने सरकार की शह पर दोबारा दुकानें खोलने के लिए सही तरह से हामी नहीं भरी। उन्होंने खुद लोगों की दुकानें खुलवाने का जिम्मा अपने ऊपर लिया और दुकानें खुलवाईं।
02जीडीआर017
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गुरदासपुर। शिव सेना पंजाब के संगठन मंत्री प्रदीप शर्मा ने अपने सदस्यों के साथ मिलकर बयान जारी किया कि दलित प्रदर्शनकारियों का विरोध सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हनन है, जो बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि पुलिस की शह पर प्रदर्शनकारियों ने शहर में उत्पात मचाया है, जो गलत है। उन्होंने बताया कि रविवार रात को सभी संगठनों और दलित वर्ग को पुलिस ने साफ कह दिया था कि बाजार में प्रदर्शन केवल साढ़े 12 बजे तक कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें पूरा रूट प्लॉन बनाकर दिया गया था। वह भी दलित प्रदर्शनकारियों ने बदल कर साढ़े बारह बजे के बाद खुली दुकानों को जबरन पुलिस की मौजूदगी में बंद करवाया। वहीं इसमें दुकानदारों को सुरक्षा देना पुलिस का कर्तव्य था। लेकिन पुलिस खुद दुकानें बंद करवाती नजर आई। इसके बाद जब प्रदर्शन खत्म हो गया, उसके बाद भी यही कहा गया कि हो सकता है कि प्रदर्शनकारी दोबारा वापस आ सकते हैं, इसलिए अपनी दुकानें बंद ही रखी जाए। जो सरासर अन्याय और दुकानदारों को डराना था। इसलिए दुकानदारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की बनती थी। वहीं पुलिस ने सरकार की शह पर दोबारा दुकानें खोलने के लिए सही तरह से हामी नहीं भरी। उन्होंने खुद लोगों की दुकानें खुलवाने का जिम्मा अपने ऊपर लिया और दुकानें खुलवाईं।
02जीडीआर017