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किसानों का 25 एकड़ से अधिक धान हुआ नष्ट
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:12 PM IST
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बारिश के पानी में डूबी 25 एकड़ फसल
गुरदासपुर। कई दिनों से लगातार हो रही बारिश से कुछ किसानों की 25 एकड़ में लगी धान की फसल डूब गई। इससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। फसल बचाने की जद्दोजहद में किसानों पंपों के माध्यम से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
काहनूवान क्षेत्र के गांव शींह भट्टी और लखनपुर का कुछ रकबा तुगलवाल से भैणी मियां खां सड़क पर पड़ते भट्ठे के पास पड़ता है। किसान उत्तम सिंह, मलकीत सिंह, जोगिंदर सिंह, जसबीर सिंह ने बताया कि उनके इस रकबे के पानी का कुदरती निकास तुगलवाल की तरफ था, इस तरफ पुराने समय से एक रजबाहा निकाले जाने के कारण और दूसरी तरफ तुगलवाल से भैणी मियां खां को जाने वाली सड़क ऊंची होने से उनके 25-30 एकड़ के रकबे का पानी किसी तरफ नहीं निकलता। बरसात थोड़ी कम या रुक-रुक कर हो तो उनका कोई बहुत नुकसान नहीं होता है। जब ज्यादा बारिश होती है तो उनकी फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो जाती है। कई साल गन्ने की फसल खराब होने के बाद उन्होंने इस रकबे में धान की फसल लगाने का फैसला किया। इस साल ज्यादा बारिश होने से उनके खेतों में कई दिनों से पानी जमा रहा, जिससे उनका धान बर्बाद हो रहा है। किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी फसल बचाने के लिए पंपों के माध्यम से पानी निकालने की कोशिश की। लगातार बरसात से समस्या आ रही है। किसानों ने मांग की कि सरकार की ओर से इस समस्या का समाधान किया जाए।
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गुरदासपुर। कई दिनों से लगातार हो रही बारिश से कुछ किसानों की 25 एकड़ में लगी धान की फसल डूब गई। इससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। फसल बचाने की जद्दोजहद में किसानों पंपों के माध्यम से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
काहनूवान क्षेत्र के गांव शींह भट्टी और लखनपुर का कुछ रकबा तुगलवाल से भैणी मियां खां सड़क पर पड़ते भट्ठे के पास पड़ता है। किसान उत्तम सिंह, मलकीत सिंह, जोगिंदर सिंह, जसबीर सिंह ने बताया कि उनके इस रकबे के पानी का कुदरती निकास तुगलवाल की तरफ था, इस तरफ पुराने समय से एक रजबाहा निकाले जाने के कारण और दूसरी तरफ तुगलवाल से भैणी मियां खां को जाने वाली सड़क ऊंची होने से उनके 25-30 एकड़ के रकबे का पानी किसी तरफ नहीं निकलता। बरसात थोड़ी कम या रुक-रुक कर हो तो उनका कोई बहुत नुकसान नहीं होता है। जब ज्यादा बारिश होती है तो उनकी फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो जाती है। कई साल गन्ने की फसल खराब होने के बाद उन्होंने इस रकबे में धान की फसल लगाने का फैसला किया। इस साल ज्यादा बारिश होने से उनके खेतों में कई दिनों से पानी जमा रहा, जिससे उनका धान बर्बाद हो रहा है। किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी फसल बचाने के लिए पंपों के माध्यम से पानी निकालने की कोशिश की। लगातार बरसात से समस्या आ रही है। किसानों ने मांग की कि सरकार की ओर से इस समस्या का समाधान किया जाए।
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