{"_id":"5a5648614f1c1b35198b5eb3","slug":"21515604065-amritsar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वच्छता सर्वेक्षण सिर पर, कूड़ा शहर की सड़कों पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वच्छता सर्वेक्षण सिर पर, कूड़ा शहर की सड़कों पर
Updated Wed, 10 Jan 2018 10:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तैयारी तो दूर निगम अफसरों को नहीं पता शहर में डंपरों की गिनतीे
स्वच्छता सर्वेक्षण सिर पर, कूड़ा शहर की सड़कों पर
तैयारी तो दूर निगम अफसरों को नहीं पता शहर में डंपरों की गिनती
अधिकारी एक दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी
जितेंद्र शर्मा।
पठानकोट।
केंद्र सरकार का स्वच्छता सर्वे सिर पर आ गया है। लेकिन पठानकोट में सर्वे के लिए कोई खास तैयारी नहीं दिखाई दे रही है। इसी हफ्ते किसी भी समय केंद्र सरकार की टीम ने शहर में सर्वे के लिए आ सकती है। लेकिन शहर में गंदगी आम देखी जा सकती है। अगर शहर में नजर घुमाई जाये तो कहीं डंपर न होने के कारण कूड़ा बिखरा है तो कहीं डंपर होने के बावजूद कूड़ा फैला है। शहर के रामलीला मैदान, फायर ब्रिगेड, डलहौजी रोड आदि पर कई जगहों पर कूड़ा फैला हुआ देखा जा सकता है। लेकिन नगर निगम अफसरों के तो क्या कहने। अफसर सफाई की जिम्मेदारी की बात एक-दूसरे पर डालते दिख रहे हैं।
पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा करवाये गए सर्वे में पठानकोट को सूबे का चौथे सबसे साफ शहर का दर्जा मिला था। जिसके बाद से नगर निगम समेत पूरा शहर गदगद था।
इसी खुशी के कारण इस बार निगम से लोगों को पिछली बार से ज्यादा उम्मीद है। निगम के दावे तो फिलहाल बड़े अच्छे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर दावों की हकीकत दिखाई दे रही है। नगर निगम ने डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन के लिए 11 नए रिक्शा जरूर खरीदे हैं। लेकिन शहर में जगह-जगह खुले में पड़े कूड़े का कोई हल नहीं दिखाई दे रहा है। नगर निगम अपनी जिम्मेदारी के प्रति सजग नहीं दिख रहा है। हालात ऐसे हैं कि निगम के अफसरों को शहर में रखे डंपरों की गिनती भी मालूम नहीं है।
मामले संबंधी जब एडीसी-कम-निगम कमिश्नर कुलवंत सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि डंपरों की गिनती बारे कोई जानकारी नहीं है। इस संबंधी निगम हेल्थ अफसर डॉ. एनके सिंह से पूछा जाए। वहीं डॉ. एनके सिंह ने कहा कि यह मामला सुपरिंटेंडेंट इंदरजीत के अधीन आता है। तो सही और पूरी जानकारी उन्हीं से मिल सकती है। इतना ही नहीं सुपरिंटेंडेंट इंदरजीत सिंह से इस बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि डंपरों के रख-रखाव का काम हेल्थ अफसर डॉ. एनके सिंह के अधीन है।
विज्ञापन
मेयर साहिब का वार्ड भी नहीं साफ
यही नहीं मेयर अनिल वासुदेवा का वार्ड भी साफ नहीं हो सका है। मेयर के वार्ड नं 17 के अधीन आते रामलीला मैदान के पास खुले में फेंका कूड़ा शहर के लिए ग्रहण बन चुका है। यहां पर बकायदा नगर निगम कूड़ा न फेंकने की चेतावनी देता हुआ बोर्ड भी लगवा चुका है। लेकिन कार्रवाई सिर्फ चेतावनी भरा बोर्ड लगाने तक ही सीमित है।
फोटो -1- पठानकोट के रामलीला मैदान के पास बिखरी पड़ी गंदगी।
विज्ञापन
स्वच्छता सर्वेक्षण सिर पर, कूड़ा शहर की सड़कों पर
तैयारी तो दूर निगम अफसरों को नहीं पता शहर में डंपरों की गिनती
अधिकारी एक दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी
जितेंद्र शर्मा।
पठानकोट।
केंद्र सरकार का स्वच्छता सर्वे सिर पर आ गया है। लेकिन पठानकोट में सर्वे के लिए कोई खास तैयारी नहीं दिखाई दे रही है। इसी हफ्ते किसी भी समय केंद्र सरकार की टीम ने शहर में सर्वे के लिए आ सकती है। लेकिन शहर में गंदगी आम देखी जा सकती है। अगर शहर में नजर घुमाई जाये तो कहीं डंपर न होने के कारण कूड़ा बिखरा है तो कहीं डंपर होने के बावजूद कूड़ा फैला है। शहर के रामलीला मैदान, फायर ब्रिगेड, डलहौजी रोड आदि पर कई जगहों पर कूड़ा फैला हुआ देखा जा सकता है। लेकिन नगर निगम अफसरों के तो क्या कहने। अफसर सफाई की जिम्मेदारी की बात एक-दूसरे पर डालते दिख रहे हैं।
पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा करवाये गए सर्वे में पठानकोट को सूबे का चौथे सबसे साफ शहर का दर्जा मिला था। जिसके बाद से नगर निगम समेत पूरा शहर गदगद था।
इसी खुशी के कारण इस बार निगम से लोगों को पिछली बार से ज्यादा उम्मीद है। निगम के दावे तो फिलहाल बड़े अच्छे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर दावों की हकीकत दिखाई दे रही है। नगर निगम ने डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन के लिए 11 नए रिक्शा जरूर खरीदे हैं। लेकिन शहर में जगह-जगह खुले में पड़े कूड़े का कोई हल नहीं दिखाई दे रहा है। नगर निगम अपनी जिम्मेदारी के प्रति सजग नहीं दिख रहा है। हालात ऐसे हैं कि निगम के अफसरों को शहर में रखे डंपरों की गिनती भी मालूम नहीं है।
विज्ञापन
मामले संबंधी जब एडीसी-कम-निगम कमिश्नर कुलवंत सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि डंपरों की गिनती बारे कोई जानकारी नहीं है। इस संबंधी निगम हेल्थ अफसर डॉ. एनके सिंह से पूछा जाए। वहीं डॉ. एनके सिंह ने कहा कि यह मामला सुपरिंटेंडेंट इंदरजीत के अधीन आता है। तो सही और पूरी जानकारी उन्हीं से मिल सकती है। इतना ही नहीं सुपरिंटेंडेंट इंदरजीत सिंह से इस बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि डंपरों के रख-रखाव का काम हेल्थ अफसर डॉ. एनके सिंह के अधीन है।
विज्ञापन
मेयर साहिब का वार्ड भी नहीं साफ
यही नहीं मेयर अनिल वासुदेवा का वार्ड भी साफ नहीं हो सका है। मेयर के वार्ड नं 17 के अधीन आते रामलीला मैदान के पास खुले में फेंका कूड़ा शहर के लिए ग्रहण बन चुका है। यहां पर बकायदा नगर निगम कूड़ा न फेंकने की चेतावनी देता हुआ बोर्ड भी लगवा चुका है। लेकिन कार्रवाई सिर्फ चेतावनी भरा बोर्ड लगाने तक ही सीमित है।
फोटो -1- पठानकोट के रामलीला मैदान के पास बिखरी पड़ी गंदगी।