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पंजाब बंद बन रहा विवाद का कारण
Updated Sat, 15 Jul 2017 10:31 PM IST
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पठानकोट में बंद के बेअसर रहने पर हिंदू संगठन आमने-सामने
पठानकोट। अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले के बाद हिंदू संगठनों द्वारा की गई पंजाब बंद की कॉल को लेकर कुछ हिंदू संगठन आमने सामने हैं। कई संगठनों ने इसका समर्थन करने से इंकार कर दिया था। इसी कारण बंद जिले में बेअसर रहा। हिंदू संगठन ही नहीं व्यापारी वर्ग ने भी इस बंद का समर्थन नहीं किया। ऐसे में बंद की कॉल करने वाले हिंदू संगठनों ने समर्थन न करने वाले संगठनों के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया है।
पंजाब बंद का एलान करने वाले हिंदू संगठनों में से एक शिवसेना समाजवादी का कहना है कि व्यापारी वर्ग ने उनका इस बंद में सहयोग नहीं किया। ऐसे में व्यापारी वर्ग भविष्य में शिवसेना से भी किसी सहयोग की कोई अपेक्षा न रखें। वहीं पंजाब बंद के एलान का बॉयकाट करने वाली शिवसेना बालठाकरे का कहना है कि कुछ संगठनों ने पंजाब बंद करने की कोशिश करके सिर्फ दुकानदारों को परेशान करने का काम किया है। व्यापारियों का कहना है कि उन्हें किसी ने बंद में शामिल होने के लिए नहीं कहा था।
शिवसेना समाजवादी के उत्तर भारत प्रमुख रवि शर्मा ने कहा कि शिवसेना बालठाकरे के प्रदेश प्रधान योगराज शर्मा जैसे नेता हिंदू संगठन में हैं। यह एक दुर्भाग्य की बात है। शिवसेना बालठाकरे ने पंजाब बंद का समर्थन न करके यह दर्शा दिया है कि वह हिंदुओं के हक में आवाज नहीं उठाना चाहते।
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वहीं शिवसेना बालठाकरे के प्रदेश प्रमुख योगराज शर्मा ने कहा कि अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले का उन्हें बेहद दुख है। वह इस हमले की निंदा करते हैं। दुकानें बंद करवाने से कुछ नहीं होगा, सिर्फ दुकानदारों को परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि कुछ संगठनों ने पंजाब बंद करवाने की कोशिश करके दुकानदारों को परेशान किया है। यह बिल्कुल गलत है। कुछ नेता संगठनों के नाम पर अपना धंधा चला रहे हैं। ऐसे नेता और संगठन फर्जी हैं।
व्यापार मंडल पठानकोट के चेयरमैन भारत महाजन ने कहा कि किसी संगठन ने उन्हें बंद में शामिल होने के लिए नहीं कहा। जिसके चलते उन्होंने बंद में शामिल न होने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि यदि उन्हेंदो दिन पहले सूचित किया जाता तो वह जरूर ही बंद में शामिल होते। वहीं पठानकोट व्यापार मंडल के प्रधान अनिल महाजन ने कहा कि पंजाब बंद की यह कॉल हिंदू संगठनों की थी। मानवता के नजरिये से उन्हें अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले का दुख है। इसके लिए दुकानें बंद करके दुकानदारों को परेशान नहीं किया जा सकता है।
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पठानकोट। अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले के बाद हिंदू संगठनों द्वारा की गई पंजाब बंद की कॉल को लेकर कुछ हिंदू संगठन आमने सामने हैं। कई संगठनों ने इसका समर्थन करने से इंकार कर दिया था। इसी कारण बंद जिले में बेअसर रहा। हिंदू संगठन ही नहीं व्यापारी वर्ग ने भी इस बंद का समर्थन नहीं किया। ऐसे में बंद की कॉल करने वाले हिंदू संगठनों ने समर्थन न करने वाले संगठनों के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया है।
पंजाब बंद का एलान करने वाले हिंदू संगठनों में से एक शिवसेना समाजवादी का कहना है कि व्यापारी वर्ग ने उनका इस बंद में सहयोग नहीं किया। ऐसे में व्यापारी वर्ग भविष्य में शिवसेना से भी किसी सहयोग की कोई अपेक्षा न रखें। वहीं पंजाब बंद के एलान का बॉयकाट करने वाली शिवसेना बालठाकरे का कहना है कि कुछ संगठनों ने पंजाब बंद करने की कोशिश करके सिर्फ दुकानदारों को परेशान करने का काम किया है। व्यापारियों का कहना है कि उन्हें किसी ने बंद में शामिल होने के लिए नहीं कहा था।
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शिवसेना समाजवादी के उत्तर भारत प्रमुख रवि शर्मा ने कहा कि शिवसेना बालठाकरे के प्रदेश प्रधान योगराज शर्मा जैसे नेता हिंदू संगठन में हैं। यह एक दुर्भाग्य की बात है। शिवसेना बालठाकरे ने पंजाब बंद का समर्थन न करके यह दर्शा दिया है कि वह हिंदुओं के हक में आवाज नहीं उठाना चाहते।
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वहीं शिवसेना बालठाकरे के प्रदेश प्रमुख योगराज शर्मा ने कहा कि अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले का उन्हें बेहद दुख है। वह इस हमले की निंदा करते हैं। दुकानें बंद करवाने से कुछ नहीं होगा, सिर्फ दुकानदारों को परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि कुछ संगठनों ने पंजाब बंद करवाने की कोशिश करके दुकानदारों को परेशान किया है। यह बिल्कुल गलत है। कुछ नेता संगठनों के नाम पर अपना धंधा चला रहे हैं। ऐसे नेता और संगठन फर्जी हैं।
व्यापार मंडल पठानकोट के चेयरमैन भारत महाजन ने कहा कि किसी संगठन ने उन्हें बंद में शामिल होने के लिए नहीं कहा। जिसके चलते उन्होंने बंद में शामिल न होने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि यदि उन्हेंदो दिन पहले सूचित किया जाता तो वह जरूर ही बंद में शामिल होते। वहीं पठानकोट व्यापार मंडल के प्रधान अनिल महाजन ने कहा कि पंजाब बंद की यह कॉल हिंदू संगठनों की थी। मानवता के नजरिये से उन्हें अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले का दुख है। इसके लिए दुकानें बंद करके दुकानदारों को परेशान नहीं किया जा सकता है।