यादें: पंजाब में है मिल्खा सिंह का 18 फुट का स्टैच्यू, देख हैरान रह गए थे फ्लाइंग सिख
राजपुरा के ग्रास आर्टिस्ट ने 1100 तिनकों को 11 हजार बार मोड़कर 10 घंटों में एक ओंकार की दुर्लभ कलाकृति बनाई थी। इस बारे में जब मिल्खा सिंह को पता चला तब उनसे रहा न गया, वह दुर्लभ कलाकृति को देखने के लिए आए थे।
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मूर्तिकार मनजीत सिंह कहते हैं कि इन स्टैच्यू की बदौलत ही उनकी मिल्खा सिंह के साथ लगभग 29 वर्ष पुरानी पहचान थी। मनजीत ने बताया कि उन्होंने महान देश भगत पार्क में अनेकों शहीदों व प्रसिद्ध शख्सियतों की मूर्तियां बनाई हैं, जिनमें 1992 में स्थापित दौड़ते हुए मिल्खा सिंह का अठारह फुट का स्टैच्यू भी शामिल है। जरखड़ (लुधियाना) के खेल स्टेडियम में स्टैच्यू जनवरी 2014 को स्थापित किया गया था। मनजीत ने बताया कि मिल्खा सिंह उन्हें कहा करते थे कि ‘मनजीत तुमने तो मेरी बरसों तक याद रखे जाने वाली यादगार बना दी।’
घास की बनी इक ओंकार की कलाकृति देखने पहुंचे थे मिल्खा सिंह
राजपुरा के ग्रास आर्टिस्ट अभिषेक चौहान ने सरदार मिल्खा सिंह के साथ बिताए पलों को इक दुर्लभ तस्वीर के साथ साझा किया है। इसमें फ्लाइंग सिख उनके द्वारा बनाए गए मास्टर आर्ट एक ओंकार की कलाकृति के दर्शन करने के लिए आए थे। ग्रास आर्टिस्ट ने 1100 तिनकों को 11 हजार बार मोड़कर 10 घंटों में एक ओंकार की दुर्लभ कलाकृति बनाई थी, जो घास से बनी एक ओंकार की विश्व की इकलौती कलाकृति है। जब मिल्खा सिंह को इसके बारे पता चला तब उनसे रहा न गया, वह दुर्लभ कलाकृति को देखने के लिए चंडीगढ़ आए थे।
फिलहाल यह कलाकृति श्री गुरु नानक देव जी के पावन स्थान श्री बेर साहिब सुल्तानपुर लोधी में सुशोभित है। चौहान ने कहा कि मिल्खा सिंह एक दिव्य चरित्र वाली शख्सियत थे। वह उन्हें सिर्फ 15 मिनट के लिए मिले थे, पर वह पल उनकी जिंदगी के सबसे अनमोल पल रहेंगे।