उधमपुर के खटीमा में काली पुलिया अंडरपास से जैसे ही पूजा का शव मिला, भाई आशीष विश्वास सिर कटी लाश को देखकर फफक पड़ा। बहन के दुपट्टे को देखकर उसने शव की शिनाख्त की। रूंधे गले से आशीष ने बताया कि रक्षाबंधन पर जब बहन ने उसे राखी बांधी थी तो उसने यही दुपट्टा पहना था। उसे एक पल के लिए विश्वास ही नहीं हुआ कि जिस बहन की राखी से उसकी कलाई सजती थी, वह अब इस दुनिया में नहीं रही। उसकी इस कदर निर्मम हत्या की गई कि शव को पहचानना भी मुश्किल हो गया। साढ़े पांच महीने से दिन रात वह बहन पूजा की सलामती की दुआ मांग रहा था। बुधवार को मुश्ताक ने निर्मम हत्या की दास्तां बया की तो आशीष के पैरों तले जमीन खिसक गई।
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पूजा की फाइल फोटो और बहन की लाश देखकर रोता बड़ा भाई
- फोटो : संवाद
बहन के साथ हुई हैवानियत की कल्पना करते-करते उसके रोंगटे खड़े हो गए और आंखों से दुख का सैलाब बहता चला गया। कभी वह बहन के दुपट्टे को तो कभी अपनी सूनी कलाई को देखकर रोता रहा। जब थोड़ा संभला तो बस हत्यारोपी को कोसते हुए पुलिस से उसे सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग करता। कहा कि इससे ही उसकी बहन की आत्मा को शांति मिलेगी।
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पूजा की फाइल फोटो
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मुश्ताक की शादी का पता चलने पर सितारगंज आई थी पूजा
सितारगंज में हरियाणा पुलिस की गिरफ्त में आए मुश्ताक अली ने बताया कि वर्ष 2022 में रुद्रपुर बस अड्डे पर उसकी पूजा से मुलाकात हुई थी। उसके बाद दोनों में जान पहचान बढ़ने लगी। कुछ समय बाद मुश्ताक भी गुरुग्राम पहुंचकर कैब चलाने लगा। इसी बीच, दोनों में प्रेम-प्रसंग शुरू हो गया। नवंबर 2024 में मुश्ताक ने घर लौटकर दूसरी युवती से निकाह कर लिया। इसका पता चलने पर पूजा भी सितारगंज पहुंची और उसकी मुश्ताक के साथ कहासुनी हुई। पंचायत में दोनों के बीच समझौता कराया गया।
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खटीमा में नंदना नहर के इसी अंडर पास पर मिला था पूजा का शव
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पूजा करती थी मुश्ताक की आर्थिक मदद
प्रेम प्रसंग के बाद मुश्ताक ने पूजा का काफी फायदा उठाया। सूत्रों के मुताबिक पूजा ने उसे सितारगंज में एक प्लॉट खरीदकर दिया। इसके अलावा वह समय-समय पर उसकी आर्थिक मदद भी करती थी। कुछ साल प्रेम प्रसंग में रहने के बाद वह शादी से मुकर गया। इस बीच उसने निकाह भी कर लिया। पूजा ने इसका विरोध किया तो उसने रास्ते से हटा दिया।
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खटीमा में नंदना नहर के इसी अंडर पास पर मिला था पूजा का शव
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कुटरी में पंक्चर की दुकान चलाता था मुश्ताक
लोगों ने बताया कि हत्यारोपी मुश्ताक अली कुछ साल पहले कुटरी गांव में पंचर लगाने की दुकान चलाता था। वह सितारगंज और खटीमा दोनों जगह रहता था। इसी बीच वह किराये पर टैक्सी चलाने का काम भी करने लगा।