साल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर ने आम आदमी के जीवन की रफ्तार काफी कम कर दी थी। हर वर्ग परेशान था। विकास कार्य ठप पड़े हुए थे। इन सब के बावजूद कोरोना से जूझते हुए पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस ने विकास के पथ पर दौड़ लगाना जारी रखा। सड़क, रेल, हवाई सफर आदि की सुविधाओं में विस्तार तो हुआ ही कई नई सौगातें भी मिलीं।
आने वाले नए साल में विकास की रफ्तार जारी रहने की उम्मीद है। शहरवासियों को 2021 यातायात सुविधाओं की सौगात दे कर जा रहा है। यातायात सुविधा के लिए किए गए कार्यों से आम लोगों को राहत मिली है।
इसमें वाराणसी से लखनऊ के लिए शटल ट्रेन, इलेक्ट्रिक बस सेवा, लोहता रेलवे स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज और हाई लेबल प्लेटफार्म, शहर के चार व्यस्त इलाकों में वाहन पार्किंग स्टैंड, रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बैठने के लिए एयरपोर्ट जैसे एग्जीक्यूटिव लाउंज की शुरुआत हुई। इसी साल मंडुवाडीह स्टेशन का नाम भी बदल कर बनारस स्टेशन किया गया।
2 of 7
बनारस में शुरू हुई इलेक्ट्रिक बस सेवा
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए नगर विकास मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री आशुतोष टंडन ने बीते 11 दिसंबर को नगर निगम स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर से 25 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसके बाद बसें अपने-अपने निर्धारित मार्ग पर चलाई जा रही हैं। इसे वाराणसी सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज के तहत चलाया जा रहा है।
3 of 7
कैंट रेलवे स्टेशन पर एग्जीक्यूटिव लाउंज
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर 25 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आईआरसीटीसी के सातवें एग्जीक्यूटिव लाउंज का उद्घाटन किया गया। इसमें यात्रियों की सुविधा संबंधी वातानुकूलित व्यवस्था, पाठकों के लिए न्यूज पेपर से लकर अन्य किताबें, खानपान की व्यवस्था व रेस्ट रूम उपलब्ध कराए गए हैं।
4 of 7
हाल ही में प्रधानमंत्री ने देखा बनारस स्टेशन
- फोटो : अमर उजाला
रेलवे बोर्ड द्वारा इसी वर्ष 14 जुलाई को मंडुवाडीह स्टेशन का नाम बदल कर बनारस किया गया। इसके बाद स्टेशन परिसर, सर्कुलेटिंग एरिया और स्टेशन जाने के मार्गों के 60 स्थानों व स्टेशन से चलने वाली 12 जोड़ी ट्रेनों के भी नाम बदल दिए गए।
5 of 7
वाराणसी-लखनऊ शटल सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी से लखनऊ के जाने वाले यात्रियों के लिए 17 नवंबर से ट्रेन संख्या 20401 वाराणसी-लखनऊ सुपरफास्ट ट्रेेन की शुरूआत हुई। जिससे काशी वासियों को कम समय में लखनऊ पहुंचने के लिए एक ट्रेन की सौगत मिल गई।