धार्मिक व सांस्कृतिक नगरी काशी में तो हर माह सैलानी सात समुंदर पार से खींचे चले आते हैं। प्राचीन देवालयों व कला कौशल की काशी में कई ऐसे मनोरम स्थल हैं, जहां पर्यटक अपनी उपस्थिति दर्ज कराने से नहीं चूकते। चाहे वो गौतम बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ हो या फिर गंगा घाट।
World Tourism Day: बनारस के ये पर्यटन स्थल, जहां हर वर्ग के लोगों के लिए है कुछ न कुछ
बाबा विश्वनाथ मंदिर, रामनगर किला, मानस मंदिर, संकट मोचन से लेकर बीएचयू के विश्वनाथ टेंपल परिसर का भ्रमण करना नहीं भूलते। यूं तो कोरोना काल ने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की राह रोक रखी है, लेकिन घरेलू पर्यटकों की आवाजाही अब रफ्तार पकड़ रही है। सारनाथ में तो हर रोज 500 से ऊपर पर्यटक पहुंच रहे हैं।
देवाधिदेव के दरबार में मत्था टेकने के बाद शुरू होता है भ्रमण
देवाधिदेव महादेव की नगरी में भ्रमण को आने वाले पर्यटक बाबा विश्वनाथ मंदिर में बगैर मत्था टेके नहीं बढ़ते। यहीं प्राचीन देवालयों को देखते हुए पर्यटक काशी की तंग गलियों में भी घूमते हैं। मंदिर से निकलने के बाद पर्यटक गंगा घाटों की ओर निकल पड़ते हैं। दशाश्वमेध व शीतला घाट पर गंगा आरती दर्शन के बाद नाव या फिर पैदल ही अन्य महत्वपूर्ण घाटों का भ्रमण करते हैं।
मानस मंदिर और संकटमोचन का भी करते हैं दर्शन
पर्यटकों की पहली पसंद दुर्गाकुंड पर मानस मंदिर देखना होता है। यहां से भ्रमण के बाद थोड़ी दूर पर स्थित संकटमोचन मंदिर भी पर्यटक जाते हैं। इसके बाद बीएचयू के विश्वनाथ टेंपल परिसर में बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही रहती है। इन टूरिस्ट प्लेस पर घरेलू पर्यटकों की संख्या अधिक रहती है। इन जगहों पर घूमने के बाद लंका से रामनगर किला के दीदार को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय दोनों पर्यटक पहुंचते हैं। कैंट रेलवे स्टेशन और बाबतपुर एयरपोर्ट से इन जगहों के लिए टैक्सी और अन्य साधन हर समय उपलब्ध रहता है।
गंगा में नौका विहार का अलग ही क्रेज
गंगा की लहरों के बीच नाव पर सवार होकर सैलानी सभी 84 घाटों का नजारा लेते हैं और उनके पौराणिक महत्व को समझते हैं। नाव, मोटर बोट व बजड़ा हर समय गंगा घाट किनारे रहते हैं। अब तो अलकनंदा क्रूज का भी संचालन आज शाम से शुरू हो जाएगा।