फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

देव दीपावली का क्या है काशी कनेक्शन, जानिए इसकी कहानी और कैसे हुई शुरुआत

Fri, 23 Nov 2018 03:17 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Fri, 23 Nov 2018 03:17 PM IST
विज्ञापन
whats is the kashi connection of dev deepawali
देव दीपावली 2018
तीनों लोक से न्यारी काशी की धरा पर आज की शाम इंद्रधनुषी छटा निखरेगी। 84 घाटों पर रोशनी का चंद्रहार पूरे खिले हुए चांद की रोशनी को चुनौती देता नजर आएगा। मौका होगा देव दीपावली का। गंगातट पर उतरे देवलोक की छवि जैसी है काशी की देव दीपावली। कार्तिक पूर्णिमा को काशी में अर्धचंद्राकार घाटों पर दीपों का अद्भुत जगमग प्रकाश 'देवलोक' जैसे वातावरण की ही सृष्टि करता है। आज शाम होने वाले इस महा आयोजन के लिए काशी में रेला उमड़ा हुआ है। गंगा घाटों पर अपनी स्थान पक्की करने के लिए काशी की गलियों और शहर के कोने-कोने से रेला चल पड़ा है। बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि देव दीपावली काशी नगरी यानि बनारस में ही क्यों मनाई जाती है तो आइये इस बात से पर्दा उठाते हैं। देखें आगे की स्लाइड्स में 

 
whats is the kashi connection of dev deepawali
dev deepawali - फोटो : अमर उजाला
देश और विदेशों में आकर्षण का केंद्र बन चुका देव दीपावली महोत्सव 'देश की सांस्कृतिक राजधानी' काशी की संस्कृति की पहचान बन चुका है। करीब तीन किलोमीटर में फैले अर्धचंद्राकार घाटों पर जगमगाते लाखों-लाख दीप, गंगा की धारा में इठलाते-बहते दीप, एक अलौकिक दृश्य की सृष्टि करते हैं। आज शाम होते ही सभी घाट दीपों की रोशनी में नहा-जगमगा उठेगा। इस दृश्य को आंखों में समा लेने के लिए लाखों देशी-विदेशी अतिथि घाटों पर उमड़ेंगे। इस अनुपम पल को कैमरे में कैद करने को उतावले सैलानियों संग गंगा की धार भी नौका और बजड़ों से ट्रैफिक जाम में बदल जाएगी।

 
whats is the kashi connection of dev deepawali
dev deepawali - फोटो : अमर उजाला
देव दीपावली को लेकर संतों विद्वानों की मान्यता के अनुसार एक तो यह कि काशी के प्रथम शासक दिवोदास ने अपने राज्य में देवी देवताओं का प्रवेश बंद कर दिया था। छिपे रूप में देवगण कार्तिक मास पंचगंगा घाट पर पवित्र गंगा में स्नान को आते रहे। बाद में देवताओं ने राजा को प्रभावित कर यह प्रतिबंध हटावा लिया। इस विजय को हर्षोल्लास से मनाने के लिए सभी देवी देवता बनारस में दीप मालाओं से सुसज्जित विजय दिवस मनाने और भगवान शिव की महाआरती के लिए कार्तिक पूर्णिमा दिन पधारे थे।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
whats is the kashi connection of dev deepawali
dev deepawali - फोटो : अमर उजाला
तभी से देव दीपावली मनायी जाने लगी। वहीं दूसरी मान्यता के अनुसार त्रिपुर नामक दैत्य पर विजय के पश्चात देवताओं ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपने सेनापति कार्तिकेय के साथ शंकर की महाआरती और नगर को दीपमालाओं से सजाकर विजय दिवस मनाया था।

 
विज्ञापन
whats is the kashi connection of dev deepawali
dev deepawali - फोटो : अमर उजाला
वैसे तो देव दीपावली का उल्लेख निर्णय सिंधु और स्मृति कौस्तुभी में भी है। काशी में इसकी शुरुआत पुरातन काल से मानी जाती है। हालांकि देव दीपावली वर्ष 1986 में पूर्व काशी नरेश स्व डॉ. विभूति नारायण सिंह पंचगंगा पर हजारा दीप जलाकर कराई थी। काशी की संस्कृति में चार लक्खा मेले में रथयात्रा मेला, नाटी इमली का भरत मिलाप, चेतगंज की नक्कटैया और तुलसी घाट की नागनथैया के बाद अब कोटि मेले के रूप देव दीपावली को माना जाता रहा है। 
 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed