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वाराणसी के संकट मोचन मंदिर पर फिर संकट, जानिए क्या है इस मंदिर का इतिहास, पौराणिक मान्यता एवं महत्व

Thu, 06 Dec 2018 01:18 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 06 Dec 2018 01:18 PM IST
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varanasi sankat mochan mandir is in danger know about this history
sankat mochan mandir - फोटो : अमर उजाला
विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी वाराणसी के प्राचीन मंदिरों में से एक संकट मोचन मंदिर को फिर से उड़ाने की धमकी के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। बम धमाका करने की धमकी एक चिट्ठी से मिली है। धमकी के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।


इस मंदिर में 2006 में भी धमाका हुआ था। वाराणसी के प्रमुख मंदिरों में से एक  संकट मोचन मंदिर के प्रति लोगों की जबरदस्त आस्था है। हर मंगलवार- शनिवार को यहां जबरदस्त भीड़ उमड़ती है। इस मंदिर का कई पौराणिक ग्रंथों में काफी सुंदर वर्णन मिलता है। इस मंदिर में स्थापित मूर्ति को देखकर ऐसा आभास होता है जेसै साक्षात हनुमान जी विराजमान हैं। आगे की स्लाइड्स में जानिए इस मंदिर के बारे में...
 
varanasi sankat mochan mandir is in danger know about this history
sankat mochan mandir - फोटो : अमर उजाला
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र को जो धमकी पत्र मिला है उसमें लिखा है कि मार्च 2006 से भी बड़ा धमाका किया जाएगा। पत्र मिलने के बाद उसे भेजने वाले जमादार मियां और अशोक कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी गई है।

बुधवार सुबह दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी इस मंदिर में दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए आतंकवादियों को चुनौती दी। कहा कि अपनी हरकत से बाज नहीं आए तो हम और हमारी सेना तुम्हारे घर में घुस कर मारेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर बनना शुरू हो जाएगा।  
 
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संकटमोचन - फोटो : self
यह वही मंदिर है जहां विश्व प्रसिद्ध संकट मोचन संगीत समारोह का आयोजन होता है। इस संगीत समारोह की अपनी ख्याति है। दुनिया भर के संगीत प्रेमियों को इसका इंतजार रहता है। देश भर के कलाकार समारोह में इसमें हाजिरी लगाते हैं। इस संगीत समारोह का आयजोन हर वर्ष अप्रैल माह में होता है।

गोस्वामी तुलसी दास द्वारा स्थापित संकट मोचन मंदिर में संगीत समारोह की शुरुआत स्वयं स्वामी गोस्वामी तुलसी दास ने 471 साल पहले की थी लेकिन तब मंदिर परिसर में रामलीला और रामायण का पाठ ही होता था। बढ़ते वक्त के साथ आयोजन भी बदलता गया। 

 
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गोस्वामी तुलसी दास
काशी प्रवास के दौरान रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने आराध्य हनुमान जी के कई मंदिरों की स्थापना की। उनके द्वारा स्थापित हनुमान मंदिरों में से एक संकटमोचन मंदिर भक्ति की शक्ति का अदभुत प्रमाण देता है। इस मंदिर में स्थापित मूर्ति को देखकर ऐसा आभास होता है जेसै साक्षात हनुमान जी विराजमान हैं।

 
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sankat mochan mandir - फोटो : अमर उजाला
मान्यता के अनुसार तुलसीघाट पर स्थित पीपल के पेड़ पर रहने वाले पिशाच से एक दिन तुलसीदास का सामना हो गया। उस पिशाच ने तुलसीदास को हनुमानघाट पर होने वाली रामकथा में श्रोता के रूप में प्रतिदिन आने वाले कुष्ठी ब्राह्मण के बारे में बताया।

इसके बाद तुलसीदास जी प्रतिदिन उस ब्राह्मण का पीछा करने लगे। अन्ततः एक दिन उस ब्राह्मण ने तुलसीदास जी को अपने दर्शन हनुमान जी के रूप में दिये। जिस स्थान पर तुलसीदास जी को हनुमान जी के दर्शन हुए थे उसी जगह उन्होंने हनुमान जी की मूर्ति स्थापित कर संकटमोचन का नाम दिया। 
 
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