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अंग्रेजों के जमाने की जिस दीवार पर बैठ कर करते थे मस्ती, उसी ने ली तीन दोस्तों की जान
Wed, 19 Dec 2018 10:51 AM IST
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न्यूज डेस्क,अमर उजाला,गाजीपुर
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Published by: utpal utpal
Updated Wed, 19 Dec 2018 10:51 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
अंग्रेजों के जमाने के बने नील गोदाम की जिस दीवार पर बैठ कर दोस्तों की टोली मस्ती किया करती थी वह उनके लिए मंगलवार को काल बन कर आई। दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई। मलबे में दबने से तीन दोस्तों की मौक पर ही मौत हो गई जबकि एक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। यह नील गोदाम गांव के बाहर नदी के किनारे स्थित था जहां लोग समय गुजारने लिए आते थे। हादसे ने दो परिवार से उनका इकलौता चिराग छीन लिया। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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- फोटो : अमर उजाला
घटना गाजीपुर जिले के मेहरल्लीपुर (भवरी) गांव की है। यहां बेसो नदी के किनारे नील गोदाम की ढाई फीट चौड़ी दीवार मंगलवार को ढह जाने से चार युवकों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। मेहरल्लीपुर निवासी चिरकुट बिंद का पुत्र रमेश बिंद (22), केवल बिंद का पुत्र धर्मेंद्र (21), महेंद्र बिंद का पुत्र उमेश (20), बेचन बिंद का पुत्र अच्छेलाल (21) और रामध्यान बिंद का पुत्र गुड्डू (20) मंगलवार सुबह दस बजे बेसो नदी के किनारे अंग्रेजों के जमाने के बने नील गोदाम के पुराने खंडहर के पास धूप ले रहे थे।
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करीब साढ़े 11 बजे दीवार एकाएक हिलने लगी और देखते ही देखते ढह गई। हादसे की खबर लोगों तक जैसे ही पहुंची लोगों के पैर घटना स्थल की तरफ बढ़ गए। कुछ ही देर में हजारों लोग मौके पर पहुंच गए। शव देखते ही नदी किनारे की शांत वातावरण में मृतकों के परिजनों की चीख-पुकार गूंजने लगी। रोज की तरह मंगलवार को गांव बिल्कुल शांत था। जैसे ही इस बात को लेकर शोर होने लगा कि बेसो नदी किनारे स्थित नील गोदाम की दीवार गिर पड़ी है और उसमें गांव के चार लड़के दब गए हैं, लोगों में हड़कंप मच गया।
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- फोटो : अमर उजाला
उन लोगों की बेचैनी अधिक बढ़ गई, जिन परिवार के लड़के घर पर नहीं थे। ऐसे लोग बिना जूता-चप्पल पहने इस आशंका से घटना स्थल की तरफ दौड़ पड़े कि कहीं उनके घर का लड़का तो दीवार में नहीं दबा है। मृतकों के परिजन मौके पर पहुंचे और उनका शव देखा तो वे बदहवास हो गए। खुले आसमान के नीचे चारों युवकों के शव पड़े थे। हर शव के पास बैठकर परिवार की महिला-पुरुष सहित बच्चे बिलखते रहे थे। यह मंजर देख वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान सांत्वना देने वालों की आंखें भी छलछला जा रही थीं।
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- फोटो : अमर उजाला
मेहरल्लीपुर उर्फ भवरी गांव के चार युवकों की मौत ने ग्रामीणों को झकझोर के रख दिया है। गांव के किनारे से गुजरी बेसो नदी की लहरें भी पूरे दिन खामोश रहीं। शायद युवकों की मौत से वह भी गमजदा हो उठी...। जिस नदी के पास प्रतिदिन गांव के चारो युवा आते जाते थे आज उसी नदी के पास स्थित जर्जर नील गोदाम की दीवार मौत बन जाएगी यह किसी ने नहीं सोचा था। गांव में परिजनों की उठने वाली चीत्कार से गांव का कोना कोना गमगीन हो उठा था...हर तरफ यही सवाल तैर रहा था यह सब क्या हो गया और कैसे हो गया।