भगवान ब्रह्मा की तपोस्थली, भगवान राम के बनवास, भगवान शिव के अज्ञातवास, मार्कण्डेय , कण्व, च्यवन जैसे ऋषियों की साधना का केंद्र, अज्ञातवास के दौरान पांडवों की मां कुंती की प्यास बुझाने वाली सोनभद्र की धरा काफी कुछ रहस्य समेटे हुए है। इसी में एक है ओंकारेश्वर घाटी। यह घाटी दूसरे पहाड़ों से देखने पर ऊँ के रूप में नजर आता है। आगे की सलाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
कैमूर पर्वत श्रृंखला के पश्चिमी और विंध्य पर्वत श्रृंखला के पश्चिमी छोर के बीच का नजारा रहस्य, रोमांच और आस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण तो है ही, सृष्टि के उद्गम को लेकर भी यह परिदृश्य काफी कुछ कहता नजर आता है। मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के दोनों तट मिलकर ऊँ का आकार बनाते हैं लेकिन चोपन और राबर्ट्सगंज के बीच स्थित इस स्थल पर ऊँ के आकार में दिखती पूरी पहाड़ी एकबारगी किसी को बिस्मित कर देती है।
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सूर्यास्त के समय पहाड़ी पर से आकाश और क्षितिज के मिलन, बारिश के समय बादलों की प्रकृति के साथ अठखेलियां, सामने स्थित पौराणिक नदी सोन, रेणुका, बिजुल का संगम ऐसा अलौकिक दृश्य उपस्थित करता है कि इसे देखने वाला व्यक्ति कुछ देर के लिए खुद को ही भूल जाता है। बता दें कि पूरे देश में ओंकारेश्वर घाटी ही एक ऐसा स्थल है जहां पहाड़ का पूरा का पूरा छोर ही ऊँ के आकार में बना हुआ है।
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विंध्य और कैमूर पर्वत श्रृंखला के बीच लंबा समतल क्षेत्र, इसके बाद अचानक 1500-200 फीट की ऊंची चढ़ाई और सामने दिखता ऊँ का आकार, लगता है जैसे हम किसी अजूबे को देख रहे हों। धार्मिक, पर्यटन और रोमांच तीनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि से संवारने के लिए कई बार आवाज उठी है।
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गुप्त काशी ट्रस्ट के जरिए इसको लेकर मुहिम चलाने वाले रविप्रकाश चौबे ने जिले के आला अधिकारियों से लेकर पर्यटन मंत्री तक गुहार लगाई लेकिन अभी तक काफी कुछ रहस्यों को समेटे इस स्थल को लेकर न तो शोध की जरूरत समझी जा सकी है, ना ही पर्यटन या धार्मिक दृष्टि से ही इस स्थल की सूरत संवारने को कोई पहल अब तक सामने आई है।