सोमवती अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है। सोमवार को सुहागिन महिलाएं पति के दीर्घायु होने की कामना के लिए व्रत रखेंगी। आगे की स्लाइड में जानें सोमवती अमावस्या का महत्व और व्रत विधान...
महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति के मुताबिक पुराणों में कहा गया है कि इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है। वहीं किसी भी पुण्य कार्य को सोमवती अमावस्या को करने से अनन्तगुणा फल की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि सोम का अर्थ चन्द्रमा से होता है। ऐसे में चन्द्रयुक्त अमावस्या एक दुर्लभ संयोग है। इस दिन स्नान, ध्यान, दान, व्रत से मानव के नकारात्मक विचारों, शक्तियों का नाश होता है। अाज सोमवती अमावस्या के साथ सूर्यग्रहण भी है।
हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, अत: इसका यहां कोई प्रभाव नहीं होगा। विशेषकर सोमवार को भगवान शिवजी का दिन माना जाता है। इसलिए सोमवती अमावस्या पर शिवजी की आराधना, पूजा और अर्चना उन्हीं को समर्पित होती है।
सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना करते हुए पीपल के वृक्ष में शिवजी का वास मानकर उसकी पूजा और परिक्रमा करती हैं। ऐसा माना गया है कि पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में शिवजी तथा अग्रभाग में ब्रह्माजी का निवास होता है। अत: इस दिन पीपल के पूजन से सौभाग्य की वृद्धि होती है।