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रिमझिम बारिश के बीच जन्मे कान्हा, गूंजे घंटा घड़ियाल, पीएम के काफिले की झांकी पर ठहरी सबकी निगाहें
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 03 Sep 2018 10:51 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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भादो की अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे काशी के घर और मंदिर घंटा-घड़ियाल से गूंज उठे। घरों में मंगल गीत और सोहर बजने लगे। अर्चकों ने महाआरती उतारी। रिम-झिम बारिश के बीच मंदिरों में नंद के घर में जन्मे कान्हा के स्वरूप को निहारने के लिए भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। झांकियों में सजे नंद के घर का नजारा देखकर श्रद्धालु निहाल हो उठे। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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कान्हा के जन्मोत्सव की खुशी में शिव की नगरी काशी नंदगांव में सजी-धजी नजर आई। करौंदा, अशोक की टहनियों, पत्तियों से नंदगांव की सजावट ने हर किसी का ध्यान खींचा। जन्मोत्सव के बाद जय कन्हैया लाल की हाथी घोड़ा पालकी... के गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे।
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में लक्ष्मीनारायण के दरबार में कन्हाई जनम लिए। गुलाब, रजनीगंधा और बेला के फूलों के वंदनवारों से परिक्रमा पथ के सभी विग्रहों का शृंगार किया गया था। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया।
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अन्नपूर्णा मंदिर, दुर्गा मंदिर समेत शहर के सभी मंदिरों में कान्हा के जन्मोत्सव की धूम रही। मध्यरात्रि के बाद पट खुलते ही बधाई बजने लगी। धर्मसंघ शिक्षा मंडल का प्रांगण भी जय कन्हैया लाल के जयघोष से गूंज उठा। 21 कुंतल मेवा युक्त हलवा के अलावा 101 तरह के व्यंजनों का भोग भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया गया। शाम को भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां देख श्रद्धालु भी मगन हो उठे। मध्यरात्रि में पंचामृत से स्नान के बाद भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ और फिर भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया।
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गुरुधाम स्थित इस्कान मंदिर में जन्मोत्सव सोमवार को होगा लेकिन नंद-गोपाल की झांकी रविवार की शाम छह बजे ही खोल दी गई। इसी के साथ दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। कलाकारों ने भजनों की ऐसी प्रस्तुति की कि लोग झूमने लगे। अक्षय वट हनुमान मंदिर में कान्हा के प्राकट्य की झांकी यादगार रही। महंत नील मिश्र और बच्चा पाठक ने महाआरती की। कश्मीरीगंज स्थित राम मंदिर को फूलों, पत्तियों और झालरों से सजाया गया है। शिव साई मंदिर बेनीपुर के अलावा शहर के अन्य मंदिरों में कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी सजाई गई।