कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली बनारस की बेटी पूनम का कहना है कि अगर भाई पहले हो जाता तो मैं शायद नहीं होती। जब मैं पैदा हुई तो मेरी दादी तो एकदम निराश हो गईं थीं। उन्होंने पिता जी से कह भी दिया था कि बेटियन क बियाह कैसे करबा...। आज तो तस्वीर एकदम बदली हुई है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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poonam yadav
- फोटो : अमर उजाला
पूनम ने कहा कि देश के लिए सोना जीतना जहां गर्व की बात है वहीं बेटे-बेटियों का अंतर का भाव भी दूर हो गया है। पूनम की मां उर्मिला ने कहा, उन्होंने कभी महसूस नहीं किया कि उन्होंने बेटियों को जन्म दिया है। पूनम के पिता ने तो बेटों से ज्यादा मेरी बेटियों की सेवा की है।
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पूनम आज जिस मुकाम पर है, उसमें उसके पिता और बड़ी बहन का बहुत योगदान है। उन्होंने घर के बागीचे में ही बेटियों के वेटलिफ्टिंग का प्रशिक्षण शुरू कराया।
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पूनम बताती हैं, बेटियों को खेल खिलाने पर गांव के लोगों ने तो ताना मारना शुरू कर दिया था लेकिन पिता ने हार नहीं मानी।
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शशि ने जब वेटलिफ्टिंग शुरू की तो उसने हम लोगों को भी खेलने के लिए प्रेरित किया। उसके प्रयास से मैं और मेरी छोटी बहन पूजा ने वेटलिफ्टिंग शुरू की।