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पीएम के संसदीय क्षेत्र में रैन बसेरों का हाल, ब्लोवर लगाकर सो रहे साहब, ठिठुर रहे राहगीर
Tue, 25 Dec 2018 10:30 AM IST
shashikant misra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Published by: shashikant misra
Updated Tue, 25 Dec 2018 10:30 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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ठंड से जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने तो बजट जारी कर दिया, लेकिन ब्लोवर लगाकर सो रहे साहब की लापरवाही से अलाव की व्यवस्था कहीं भी ठीक नजर नहीं आई। राहगीर अब भी ठंडी रातों में ठिठुर रहे हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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रविवार रात दस बजे के बाद अमर उजाला की टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रैन बसेरा की व्यवस्थाओं की हकीकत जानने निकली तो नजारा हैरान कर देने वाला मिला, लेकिन साहब को शायद कुछ भी नजर नहीं आता, इसीलिए वह हकीकत से मुंह फेर रहे हैं। उधर, लहरतारा गेट नंबर चार पर ओवरब्रिज का निर्माण चल रहा है। इसके लिए करीब आठ-नौ माह से सेतु निगम ने नगर निगम के रैन बसेरे के एक कमरे को ही अपना दफ्तर बना लिया है।
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रैन बसेरा के बाहर छोटी-छोटी लकड़ियां जल रही थीं। दरवाजा बंद कर रैन बसेरे के अंदर कर्मचारी राम सूरत सो रहा था। आवाज देने पर किसी तरह उठा और दरवाजा खोला। अंदर उसके अलावा दो और लोग अंदर सो रहे थे। गंदे हो चुके रजाई और गद्दे के सहारे वे ठंड से बचाव कर रहे थे। पूछने पर दोनों ने अपना नाम अमित कुमार और वीरेंद्र कुमार निवासी आजमगढ़ बताया। वह दवा लेने आए थे और देर होने से घर नहीं जा सके थे।
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नगर निगम के इस रैन बसेरे में एनजीओ का कर्मचारी जय धारिया रजिस्टर लेकर सो रहा था। उसकी बाइक रैन बसेरे के अंदर खड़ी थी। यहां एक भी व्यक्ति नहीं सो रहा था। हालांकि बाहर रजाई और गद्दा बिछाकर एक व्यक्ति सो रहा था। उसने बताया कि कमरे में दम घुटता है, इसलिए वह बाहर ही सो रहा था। रजिस्टर देखने पर पता चला कि दो दिन पहले चार लोग वहां ठहरे थे। यहां भी रजाई और गद्दे इतने गंदे थे कि पूछिए मत।
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रैन बसेरे का गेट बाहर से बंद था। काफी देर आवाज देने पर वहां तैनात कर्मचारी ने गेट खोला। पहले तो धमक जमाई, लेकिन कैमरा देख सब कुछ समझ गया। खुद का नाम मनोज गौतम बताने वाला यह कर्मचारी रैन बसेरे के कार्यालय में हीटर लगाकर सो रहा था। रजिस्टर देखने पर अधिकांश नाम कागजी लगे, क्योंकि रजिस्टर में अंकित फार्मेट के हिसाब से इंट्री ही नहीं की गई थी।