नौकरी के नाम पर नेपाली युवतियों को भेजने का नेटवर्क बनारस से लेकर खाड़ी देशों तक फैला हुआ है। नेपाली युवतियों को बाकायदा बनारस ले आया जाता है और फिर यहां से विभिन्न हवाई अड्डों से उन्हें खाड़ी देशों में भेज दिया जाता है। यहां से दिल्ली, मुंबई, फिर वहां से दूसरे देशों को ये युवतियां भेज दी जाती हैं। बता दें कि इसी तरह का एक सिंडिकेट अभी सामने आया है जब वाराणसी पुलिस ने दिल्ली में छापा मार कर 16 नेपाली युवतियों को मुक्त कराया है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
क्राइम ब्रांच की तफ्तीश में कई ऐसे एजेंट व एजेंसियों के नाम सामने आए हैं जिन पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है। इतना ही नहीं एयरपोर्ट व एयरलाइंस कर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में हैं, जिसको लेकर पूछताछ हो सकती है।
नेपाली युवतियों को बंधक बनाकर जबरन देह व्यापार कराने के मामले में सोमवार की रात क्राइम ब्रांच ने दिल्ली पुलिस के सहयोग से कार्रवाई की। नेपाली युवतियों को बाहर भेजने का यह कोई पहला मामला नहीं है। नेपाल में गरीबी का फायदा उठाकर, वाराणसी, दिल्ली, मुंबई, गल्फ कंट्री में सक्रिय सिंडिकेट ऐसी युवतियों को अच्छी मजदूरी का झांसा देकर अलग-अलग देशों में भेज देते हैं।
इस काम के लिए एजेंट व ऐसी ट्रैवेल एजेंसियों को दो से ढाई लाख रुपये मिलते हैं। सबसे ज्यादा नेपाली लड़कियां गल्फ कंट्री भेजी जा रही हैं। क्राइम ब्रांच की जांच में ऐसे कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं जो इस सिंडिकेट से जुड़े हैं।वाराणसी एयरपोर्ट पर अक्सर नेपाली युवतियों का झुंड नजर आता है पर रोक टोक न होने के चलते बेधड़क यह व्यापार चल रहा है।
बिना भारत सरकार की अनुमति किसी को देश में बसाना या नौकरी का झांसा देकर बाहर भेजना अपराध है। ऐसे लोगों पर अप्रवास अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।