{"_id":"5b6845b14f1c1ba13e8b560b","slug":"minor-boy-return-alive-after-six-yeas-at-sonebhadra","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"आश्चर्यजनकः अंतिम संस्कार के बाद जिंदा मिला किशोर, देखने को उमड़ रही लोगों की भीड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आश्चर्यजनकः अंतिम संस्कार के बाद जिंदा मिला किशोर, देखने को उमड़ रही लोगों की भीड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Tue, 07 Aug 2018 10:40 AM IST
विज्ञापन
परिवार वालों ने बबलू समझ दूसरे का किया था दाह संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
sonebhadra
- फोटो : अमर उजाला
सोनभद्र के कोन थाना क्षेत्र के बागेसोती गांव में करीब छह वर्ष बाद रामनंदन का पुत्र बबलू वापस लौट आया। यह चमत्कार हुआ पुलिस की आपरेशन मुस्कान के तहत। सोमवार को भी उसे देखने वालों की भीड़ उसके घर पहुंची। उसके जिंदा लौटने पर गांव के लोग इस बात की चर्चा करने लगे हैं कि आखिरकार परिवार वालों ने जिस मृतक के शव का दाह संस्कार छह साल पूर्व कर दिया वह बालक कौन था।
up police
कोन थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बागेसोती के सिंगा गांव का बबलू पुत्र रामनंदन 2012 में झारखंड के डाल्टेनगंज से गुम हो गया था। उस समय बबलू की उम्र करीब 12 वर्ष थी। उसके गायब होने की गुमशुदगा भी उसी समय डाल्टेनगंज में दर्ज हुई थी। लोगों की मानें तो गायब होने के कुछ समय बाद डाल्टनगंज में एक नाबालिक का शव बरामद हुआ था। जिसके बाद स्थानीय पुलिस रामनंदन को शिनाख्त के लिए बुलाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
UP Police
उस समय रामनंदन ने शव की शिनाख्त अपने बेटे बबलू के रूप में की थी। बाद में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मामले में नया मोड़ तब आया जब कोन थाना को सूचना मिली कि क्षेत्र का एक युवक उड़ीसा में है। बाद में पुलिस ने संपर्क स्थापित करके युवक को बुलाया और पुन: उसके मां-बाप से शिनाख्त कराई तो रामनंदन ने युवक को अपना खोया हुआ बेटा बबलू बताया। पुलिस ने इसी आधार पर बबलू की सुपुर्दगी रामनंदन को दे दी।
विज्ञापन
परिवार वालों ने बबलू समझ दूसरे का किया था दाह संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
महज छह साल की उम्र में जो बच्चा गायब हुआ था उसे बरामद करने के लिए पुलिस ने उड़ीसा के कटक थाने, वहां के स्थानीय लोगों व यहां के परिजनों से संपर्क किया। पहले जब यह पता चला कि एक दुकान पर काम करने वाला बच्चा यूपी के सोनभद्र जिले का है तो उससे बात करने की कोशिश की गई। लेकिन बबलू उड़िया भाषा में बोल रहा था। इससे कुछ समझ में नहीं आया। बाद में पुलिस ने परिजनों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बच्चे की तस्वीर दिखा गई। बात भी करायी गई। इस आधार पर बच्चे को वहां से लाकर परिजनों को सौंपा।