राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव की दूसरी निशा को भोजपुरी गायक, अभिनेता और सांसद मनोज तिवारी मृदुल की मौजूदगी ने मस्ती और उल्लास से भर दिया। रविवार की शाम विविध रंगों से सजे इस महोत्सव में मनोज ने भोजपुरी की मिठास भरी।
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विविध रंगों से सजा महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
संस्कृति महोत्सव की दूसरी संध्या पर शास्त्रीय गायन और वादन की भी मिठास घुली। पंडित ओंकार नाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में भारतीय शास्त्रीय संगीत संध्या की शुरुआत पंडित अजय चक्रवर्ती के गायन से हुई। उन्होंने राग कल्याण से शुरुआत की।
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कुलगीत से की शुरुआत, महामना और बीएचयू को किया नमन
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विश्वविद्यालय के कुलगीत से शुरुआत के बाद मनोज जब अपनी लय में आए तो सुरों की खुशबू से शाम गमक उठी। आवाज और अंदाज का जादू श्रोताओं पर इस कदर छाया कि न तालियों की गूंज थमी न फरमाइशों का सिलसिला। फिर तो ‘बिहार के लाला’ से ‘गंगा मेरी माता’ तक स्वरलहरियों के उतार-चढ़ाव के साथ उत्सव का रंग गहराता चला गया।
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विविध रंगों से सजा संस्कृति महोत्सव
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बीएचयू के छात्र रहे मनोज को सुनने के लिए दर्शकों और युवाओं का जबरदस्त मजमा था। दो घंटे का लंबा इंतजार, बावजूद इसके जोश और उत्साह भरपूर। मनोज ने स्वतंत्रता भवन स्थित संस्कृति महोत्सव के मंच पर अपने कार्यक्रम का आगाज बीएचयू के पुरातन छात्र होने के नाते बीएचयू के कुलगीत ‘...मधुर मनोहर अतीव सुंदर’ से किया।
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विविध रंगों से सजा संस्कृति महोत्सव
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इसी क्रम में सौरव-गौरव मिश्र का कथक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति हुई। ...डिमिक डिमिक डम डम डमरू बाजे, प्रेम मगन नाचे भोला गीत पर उनकी प्रस्तुति हर किसी के लिए यादगार बनी।