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वाराणसी के मार्कण्डेय महादेव मंदिर में पूरी होती है मनोकामना, यहां यमराज भी हुए थे पराजित

Fri, 24 Feb 2017 04:09 PM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी
टीम डिजिटल,वाराणसी Updated Fri, 24 Feb 2017 04:09 PM IST
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mahashivratri special: know the facts about markendy mahadev temple of varanasi
मार्केण्डेय मंदिर - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी से करीब 30 किमी दूर गंगा-गोमती के संगम तट पर स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर में महाशिवरात्री के अवसर पर भक्तों का तांता लगा हुआ है। यह मंदिर वाराणसी गाजीपुर राजमार्ग पर कैथी गांव के पास है। आगे की स्लाइड्स में जानें मंदिर का  महात्म्य..
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मार्केण्डेय मंदिर - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्री के अवसर पर यहां पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से लाखों भक्त जलाभिषेक करने के लिए आते हैं। ‌‌शिवरात्री के अवसर पर यहां काशी विश्वनाथ मंदिर से भी ज्यादा भीड़ होती है। सावन माह में भी एक माह का मेला लगता है। मार्कण्डेय महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों में से एक है। विभिन्न प्रकार की परेशानियों से ग्रसित लोग अपनी दुःखों को दूर करने के लिए यहाँ आते हैं। 
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मार्केंडय मंदिर - फोटो : अमर उजाला

मार्कण्डेय महादेव मंदिर की मान्यता है कि 'महाशिवरात्रि' और उसके दूसरे दिन श्रीराम नाम लिखा बेल पत्र अर्पित करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। मंदिर के बारे में और कई कहानियां प्रचलन में है। 
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मार्केंडय मंदिर - फोटो : अमर उजाला

मार्कण्डेय महादेव मंदिर के बारे में एक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि प्रचिन काल में जब मार्कण्डेय ऋषि पैदा हुए थे तो उन्हें आयु दोष था। उनके पिता ऋषि मृकण्ड को ज्योतिषियों ने बताया कि बालक की आयु मात्र 14 वर्ष है। यह सुन माता-पिता सदमें आ गए। 
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मार्केंडय मंदिर - फोटो : अमर उजाला
ज्ञानी ब्राह्मणों की सलाह पर बालक मार्कण्डेय के माता-पिता ने गंगा गोमती संगम तट पर बालू से शिव विग्रह बनाकर  शिव की अर्चना करने लगे। भगवान शंकर की घोर उपासना में लीन हो गये। बालक मार्कण्डेय के जैसे ही 14 वर्ष पूरे हुए तो यमराज उन्हें लेने आ गए। बालक मार्कण्डेय भी उस वक्त भगवान शिव की अराधना में लीन थे। उनके प्राण हरने के लिए जैसे ही यमराज आगे बढ़े तभी भगवान शिव प्रकट हो गए। 
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