भोलेनाथ की नगरी वाराणसी में भी गंगा नदी रौद्र रूप दिखा रही हैं। हालत यह हो गई है कि गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर से एक मीटर नीचे बह रहा है। जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण वरुणा में पलट प्रवाह शुरू हो गया है। बाढ़ की आशंका में वरुणा पार इलाकों में शुक्रवार को लोग पलायन करते दिखे। इधर, शवदाह में परेशानियां शुरू हो गई हैं। हरिश्चंद्र घाट पर जहां गलियों में शवदाह हो रहा है वहीं मणिकर्णिका घाट पर छतों पर शवदाह किया जा रहा है।
जगह कम होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ताजा स्थिति को देखते हुए पुलिस-प्रशान अलर्ट मोड में है। घाट के किनारों पर एनडीआरएफ ने नजर बना रखी है। नौका के बाद क्रूज के संचालन पर 21 अगस्त तक रोक लगा दी गई है।
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अस्सी घाट का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
अस्सी घाट पर सुबह ए बनारस का मंच डूब चुका है। सड़क पर पानी आने को बेताब है। दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस का बूथ में पानी घुस गया है। शीतला मंदिर का गर्भगृह जलमग्न हो चुका है। इसके चलते माता शीतला की चल प्रतिमा को आरती के बाद अहिल्याबाई स्टेट में अहिलेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में स्थापित कर दिया गया है।
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अस्सी घाट का नजारा
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बढ़ते जलस्तर ने मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट को पूरी तरह डुबो दिया है। मणिकर्णिका घाट पर शवदाह स्थल का 80 फीसदी निचला हिस्सा पानी में समा गया। शवदाह अब छत पर हो रहा है। वहीं, सिंधिया घाट की ओर से बढ़ते जलस्तर ने मणिकर्णिका घाट की गली को पूरी तरह जलमग्न कर दिया है।
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वाराणसी में बढ़ा बाढ़ का खतरा
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शुक्रवार सुबह गंगा के जलस्तर में आठ सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ाव दर्ज किया गया। इसका असर सबसे अधिक नमो घाट व वरुणा के तटवर्ती इलाकों में देखा जा रहा है। गंगा की तेज लहरें जहां नमो घाट को अपने आगोश में ले ली है।
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दशाश्वमेध घाट का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
वहीं गंगा का प्रवाह वरुणा में पलटने से तटवासियों के रहन-सहन पर संकट गहरा गया है। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर निकलने लगे हैं।