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स्मृति शेष: सर्वविद्या की राजधानी से था अटल जी का गहरा नाता, यहीं से शुरू हुआ पत्रकारिता जीवन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 17 Aug 2018 10:20 AM IST
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atal bihari
- फोटो : कला कुंज/स्पीड कलर लैब, आगरा से साभार
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को काशी बहुत रास आती थी। उन्होंने इसी काशी से पत्रकारिता शुरू की। यहीं वह संपादक रहे। यह वाकया 1957-58 का है। काशी और काशी के कण-कण से उनका वास्ता रहा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, मां गंगा का तट, तुलसीघाट, काशी की विश्व प्रसिद्ध मिठाई खाना वह कभी नहीं भूले। उनका जन्म भले ही ग्वालियर जिले में हुआ हो मगर सर्वविद्या की राजधानी से उनका गहरा नाता था। अपने एक भाषण के दौरान भी उन्होंने इस बात का खुलासा किया था। यह कहना है प्रख्यात साहित्यकार, संपादक स्व. मोहन लाल गुप्ता भइया जी बनारसी के प्रपौत्र राजेश गुप्ता का। आगे की स्लाइड्स में देखें....
atal bihari
- फोटो : कला कुंज/स्पीड कलर लैब, आगरा से साभार
भइया जी बनारसी अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वाराणसी के सबसे प्रतिष्ठित अखबर ‘आज’ के साहित्य संपादक हुआ करते थे। 1942 में भइया जी बनारसी ने वाराणसी से ‘समाचार’ नामक अखबार का प्रकाशन किया था। राजेश ने बताया कि अटल जी का वाराणसी से बहुत ही गहरा नाता रहा है। वाजपेयी जी ने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत वाराणसी से ही की थी। उस जमाने में बनारस से एक अखबार निकलता था जिसका नाम था ‘समाचार’। आधे पैसे की कीमत वाले उस अखबार में तब अटल बिहारी वाजपेयी, नाना जी देशमुख और बाला साहब देवरस जैसे लोग लिखा करते थे। अटल जी ‘समाचार’ अखबार के लिए लेख, यात्रा संस्मरण और रिपोर्ट लिखा करते थे। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी वीर अर्जुन और पांचजन्य के संपादक भी रहे।
Atal Bihari Vajpayee
राजेश गुप्ता ने बताया कि उत्तर भारत का तब सबसे बड़ा अखबार वाराणसी से निकलने वाला ‘आज’ अखबार हुआ करता था। बाबू शिव प्रसाद गुप्त ने इस अखबार की नींव रखी थी। उस वक्त स्व. मोहन लाल गुप्ता जिन्हें बनारस में लोग भइया जी बनारसी कहते थे, आज अखबार में साहित्य संपादक थे। भइया जी बनारसी चुन-चुन के इस तरह के उदीयमान और प्रतिभावान लोगों को बुलाकर लाते थे। अटल जी की भी उस दौर की तमाम कविताएं उन्होंने अखबार में छापी थीं।
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atal bihari vajpayee
- फोटो : amar ujala
राजेश गुप्ता के अनुसार अटल जी के राजनीतिक जीवन पर भी काशी के पानी का बहुत बड़ा योगदान है। यही नहीं उस जमाने में काव्य गोष्ठियां हुआ करती थीं, जिसमें अटलजी ना सिर्फ शिरकत किया करते थे, बल्कि बड़ी शिद्दत के साथ अपनी लिखी हुई कविताओं का ओजस्वी पाठ किया करते थे। यही कारण था कि वाराणसी की पुरानी काव्य गोष्ठियां अटलजी के कारण और भी समृद्ध थी।
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अटल बिहारी बाजपेई
अटल जी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे उनका हर वर्ग के साथ निकट का संबंध रहा। कवि हृदय अटल बिहारी वाजपेयी शास्त्रीय संगीत के प्रेमी भी थे। बीएचयू के प्रो. कौशल किशोर मिश्र बताते हैं कि अटल जी स्वामी करपात्री जी के शिष्यों में एक रहे तो जनसंघ के जनक मंडल में एक रहे हरिश्चंद्र श्रीवास्तव हरीश जी उनके निकटस्थ लोगों में रहे। इनके अलावा मशहूर पखावज वादक पंडित अमर नाथ मिश्र, तबला वादक किशन महाराज, गंगा आंदोलन के जनक प्रो वीरभद्र मिश्र, पद्मविभूषण पट्टाभि रमण शास्त्री, प्रो विद्या निवास मिश्र, प्रो कृष्ण नाथ शर्मा, नजीर बनारसी भी अटल जी के हृदय के नजदीक थे।