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प्रथम नवरात्र: कोरोना के बीच माता के दर्शन करने को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नौ दिन करें ये काम

Sat, 17 Oct 2020 05:01 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 17 Oct 2020 05:01 PM IST
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First Navratri: A crowd of devotees gathered to visit the Mother amidst Corona in varanasi do this work for nine days
मां शैलपुत्री देवी के मंदिर में दर्शन-पूजन करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

वाराणसी में शनिवार से शुरू हुए नवरात्र के पहले दिन अलईपुर स्थित मां शैलपुत्री के प्राचीन मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर में प्रवेश के लिए जिला प्रशासन द्वारा जारी कोरोना गाइडलाइन के साथ भक्तों को प्रवेश दिया जा रहा है।

First Navratri: A crowd of devotees gathered to visit the Mother amidst Corona in varanasi do this work for nine days
मां शैलपुत्री देवी के मंदिर में दर्शन-पूजन करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।

भक्तों की बस यही कामना कि विश्व को महामारी से मां बचाएं और शांति और संपन्नता बनाए रखें। जिला प्रशासन की ओर से जारी गाइडलाइन के बाद मंदिर के चारों को बैरिकेट भी किया गया है। भक्तों के उत्साह के आगे कोरोना महामारी का डर खत्म सा दिख रहा है।

First Navratri: A crowd of devotees gathered to visit the Mother amidst Corona in varanasi do this work for nine days
मां शैलपुत्री का हुआ श्रंगार। - फोटो : अमर उजाला

भगवती मां दुर्गा की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो गया। नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के अनुसार मां भगवती की पूजा-अर्चना से सुख व सौभाग्य में बढ़ोत्तरी होती है। शारदीय नवरात्र में शक्तिस्वरूपा मां दुर्गा, काली, लक्ष्मी एवं सरस्वती जी की विशेष आराधना फलदायी मानी जाती है।

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First Navratri: A crowd of devotees gathered to visit the Mother amidst Corona in varanasi do this work for nine days
चैत्र नवरात्र: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा - फोटो : अमर उजाला

ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि व्रतकर्ता को प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान, ध्यान, पूजा अर्चना के पश्चात अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गंध व कुश लेकर भगवती की पूजा एवं व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त 11:36 से लेकर 12:24 बजे तक है। कलश स्थापना प्रात:काल में भी की जा सकती है। कलश स्वर्ण, रजत या मिट्टी का हो तो बेहतर है। कलश पर स्वास्तिक बनाकर, उसके ऊपर कलावा बांधकर जल भर लें। कलश में पुष्प, नकद द्रव्य, चावल, रोली आदि छोड़ देना चाहिए। इसके बाद मां का ध्यान करके कलश स्थापित करें।

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First Navratri: A crowd of devotees gathered to visit the Mother amidst Corona in varanasi do this work for nine days
शारदीय नवरात्र - फोटो : गूगल

नवदुर्गा को नौ दिन करें अर्पित
प्रथम - उड़द, हल्दी, माला-फूल
द्वितीया -तिल, शक्कर, चूड़ी, गुलाल, शहद
तृतीया- लाल वस्त्र, शहद, खीर, काजल
चतुर्थी-दही, फल, सिंदूर, मसूर
पंचमी-दूध, मेवा, कमलपुष्प, बिंदी
षष्ठी- चुनरी, पताका, दूर्वा
सप्तमी-बताशा, इत्र, फल-पुष्प
अष्टमी-पूड़ी, पीली मिठाई, कमलगट्टा, चंदन, वस्त्र
नवमी-खीर, सुहाग सामग्री, साबूदाना, अक्षत फल, बताशा

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