आदि विश्वेश्वर बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में देव दीपावली की रात पूरा देवलोक गंगा के तट पर उतर आया। पीएम नरेंद्र मोदी ने जैसे ही दीप जलाया तो उत्तरवाहिनी के अर्ध चंद्राकार घाटों ने दीपों के चंद्रहार से श्रृंगार किया। शाम होते ही 15 लाख दीयों से गंगा के 84 घाट जगमगा उठे। अलौकिक आभा को देश ही नहीं दुनिया ने भी निहारा। रात गहराने के साथ ही गंगा की लहरों पर दीयों के प्रकाश का स्वर्णिम सौंदर्य बिखर गया।
Dev Diwali 2020: काशी विश्वनाथ की नगरी में अर्धचंद्राकार गंगा घाटों पर नजर आया देवलोक, देखें तस्वीरें
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घाटों की साज सज्जा ऐसी कि मानो स्वर्ग साक्षात मां गंगा के आंचल में समाने को व्याकुल हो रहा हो। दूर गंगा के उस पार रेती पर भी आस्थावानों की चहलकदमी घाटों की अर्ध चंद्राकार छवि को अपलक निहारती नजर आई। सूर्यास्त के साथ ही माटी के दीपों में तेल की धार से रुई की बाती तर होकर दैदीप्यमान हो उठी।
गोधूलि बेला में एक-एक कर दीपों की असंख्य लड़ियां पूनम के चांद को भी अपनी रोशनी से चुनौती देते नजर आईं। दीपों की अनगिनत कतारों से अर्ध चंद्राकार घाटों ने दीयों के चंद्रहार का स्वरूप ले लिया। गंगा तट के दूसरे किनारे पर भी गंगा की रेती भी दीयों से प्रकाशमान हो उठी। गंगा के इस ओर से उस छोर तक सिर्फ और सिर्फ दीपों की कतार ही नजर आ रही थी। काशी विश्वनाथ दरबार से लेकर सारनाथ स्थित सारंगनाथ मंदिर शाम होते ही दीयों से सजने लगा।
एक साथ जल उठे लाखों दीप
दशाश्वमेध घाट पर दोपहर से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। शाम ढलते-ढलते घाट पर पांव रखने की भी जगह मिलनी मुश्किल हो गई। इसके बाद लोगों ने दूसरे घाटों की ओर बढना शुरू कर दिया। पंचगंगा घाट पर प्रकाशित होने वाला हजारा दीपों के मंच ने भी आभा बिखेरी।
आस्थावानों ने अर्पित की श्रद्धा
देव दीपावली पर घाट, गलियां और नदी का किनारा श्रद्धालुओं से पटा नजर आया। जैसे-जैसे भगवान भाष्कर अस्ताचलगामी हुए गंगा तट, कुंड, सरोवर और मंदिरों में दीपदान करने वालों का रेला बढ़ता ही चला गया।