पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को गया था। आज पूरा देश पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर रहा है। वाराणसी और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) उन्हें कभी नहीं भूल सकता है। खासकर उस एक पल को जब वह बीएचयू आए थे।
वाराणसी के आईआईटी बीएचयू के पहले दीक्षांत समारोह का वो दिन आज भी लोगों को याद आता है, जब देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने समारोह में मंच पर पहुंचने के बाद वहां लगी बड़ी कुर्सी को लौटा दिया था। कुछ देर तक तो लोग समझ नहीं पाए थे कि डॉ कलाम ने ऐसा क्यों किया लेकिन बाद में डॉक्टर कलाम ने सामने बैठे लोगों की ओर इशारा करते हुए तत्कालीन निदेशक से बातचीत की और इसके बाद एक सामान्य कुर्सी मंच पर मंगाई गई, तब बैठे।
3 of 5
काशी हिंदी विश्वविद्यालय।
यह बात 10 जुलाई 2013 की है, जब आईआईटी बीएचयू के पहले दीक्षांत समारोह में डॉ कलाम बतौर मुख्य अतिथि आए थे। इस दौरान उन्होंने वर्ष 2011 और 2012 के छात्र छात्राओं को पदक और डिग्रियां बांटी थीं। आईआईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक और तत्कालीन निदेशक प्रोफेसर राजीव संगल बताते हैं कि दीक्षांत समारोह में नियमानुसार विद्दत यात्रा निकलने के बाद मंच पर जैसे ही डॉ कलाम पहुंचे, वहां लगी कुर्सियों की लाइन में सबसे बीच में बड़ी वाली कुर्सी को देखा तो बैठने से मना कर दिया।
उसे हटाने के लिए भी कहा और कुछ देर बाद जब वहां सामान्य कुर्सी मंगाई गई तब जाकर वह बैठने को तैयार हुए। प्रोफेसर संगल ने बताया कि आईआईटी के निदेशक बनने की जानकारी मिली तो डॉक्टर कलाम से मिलने गए और वहां उन्होंने डॉ कलाम से निदेशक पद पर का कार्यभार संभालने के लिए राय जाननी चाही तो उन्होने कहा कि बेहिचक जाइए और काम करिए।
5 of 5
अब्दुल कलाम
- फोटो : SELF
उधर आईआईटी बीएचयू में छात्र अधिष्ठाता प्रो बीएन राय ने कहा कि दीक्षांत समारोह का वो दिन और कलाम साहब की सादगी तो हमेशा याद रहेगी उन्होंने डाक्टर कलाम को महामानव बताया। हालांकि आईआईटी से पहले 2006 में डॉ. कलाम बीएचयू के दीक्षांत समारोह में भी आ चुके थे।