Varanasi News: मदनपुरा इलाके में 15 साल सात महीने के बाद सिद्धिश्वर महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया। पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने मंदिर में स्थित शिवलिंग पर जल अर्पित किया और विधि-विधान से पूजन किया। मंदिर के कपाट अब नियमित रूप से रोजाना दो घंटे के लिए खुलेंगे।
Varanasi News: 15 साल सात महीने बाद सिद्धिश्वर महादेव मंदिर में शुरू हुआ पूजन और जलाभिषेक, तय होगी व्यवस्था
सावन के पवित्र माह में सिद्धिश्वर महादेव मंदिर में हर-हर महादेव का उद्घोष होते ही आसपास के भक्त यहां माैजूद हो गए। भक्तिमय माहाैल के बीच पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।
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शुक्रवार को सुबह विश्व हिंदू परिषद काशी प्रांत महानगर उत्तर के अध्यक्ष राजेश मिश्र के नेतृत्व में कार्यकर्ता मदनपुरा पहुंचे। उन्होंने हर-हर महादेव के जयघोष के साथ मंदिर का ताला खोला। मंदिर का कपाट खुलते ही वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने भी हर-हर महादेव का जयघोष किया। शिव भक्तों ने मंदिर के कपाट खुलने पर मंदिर व विग्रहों की साफ सफाई की। इसके बाद मंदिर में मौजूद शिवलिंग का रुद्राभिषेक हुआ। आरती के साथ विशेष पूजा संपन्न की गई।
मंदिर अब रोजाना सुबह आठ बजे से 10 बजे तक खोला जाएगा। बाबा प्राण प्रतिष्ठित हैं और पुनः प्राणप्रतिष्ठा की कोई आवश्यकता नहीं है। जहां तक मूल शिवलिंग के गायब होने की बात है तो अगर किसी के पास प्रमाण है तो वह इसे साझा कर सकता है।
इस मामले में काशी के विद्वत समाज से राय लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। उनका सुझाव जो भी होगा उसके अनुसार कार्य किया जाएगा। यह मंदिर काशी की जनता का है। फिलहाल मंदिर को सुबह दो घंटे खोला जाएगा और आगे इसकी अवधि बढ़ाने पर विचार होगा। इस दौरान सुनील कुशवाहा, विनय चौबे,विनोद दुबे, गुरु प्रसाद, देवेश मौजूद रहे।
सिद्धिश्वर महादेव का मूल पाषाण शिवलिंग गायब
सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा का दावा है कि मदनपुरा में मिले सिद्धिश्वर महादेव के मंदिर का मूल पाषाण शिवलिंग गायब है। मंदिर में जो भी शिवलिंग हैं, वह नर्मदेश्वर लिंग हैं। सभी शिवलिंग खंडित हैं। एक शिवलिंग एक फीट और बाकी डेढ़ व पौने दो फीट के हैं। यह स्मृति शिवलिंग हैं, जिसे किसी ने मंदिर में रखवाया था।
17 दिसंबर 2024 को मिली थी मंदिर की सूचना
मदनपुरा गोल चबूतरा इलाके में स्थित मकान नंबर डी-31/65 के पास मंदिर मिलने की सूचना 17 दिसंबर 2024 को मिली थी। सोशल मीडिया पर लिखा गया कि यह मंदिर पिछले 15 साल से बंद है। इसके बाद सनातन रक्षक दल के कार्यकर्ता मंदिर का ताला खुलवाने पहुंच गए थे।
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस तैनात कर दी गई थी। जिला प्रशासन ने कहा था कि कागजों की जांच के बाद मंदिर खुलवाने का निर्णय लिया जाएगा। जिला प्रशासन ने दस्तावेज की जांच की और पता चला कि मंदिर एक सार्वजनिक स्थल है। मंदिर से सटे भवन को मुस्लिम परिवार को बेचा गया था, लेकिन मंदिर की जमीन पर किसी का स्वामित्व नहीं था।