फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

आजमगढ़ के एक ‘भूत’ ने दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ लड़ा चुनाव, मामला हैरान कर देने वाला

Thu, 01 Mar 2018 02:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Thu, 01 Mar 2018 02:07 PM IST
विज्ञापन
A man had struggle to prove himself alive
lal bihari - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक ‘भूत’ ने दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ चुनाव लड़ा। ‘भूत’ ने न सिर्फ दो प्रधानमंत्रियों के खिलाफ चुनाव लड़ा बल्कि अपने चचेरे भाई का अपहरण किया। और तो और पत्नी को विधवा पेंशन के लिए आवेदन कराया। पूरा मामला जानकर कोई भी हैरान हो जाएगा आगे की स्लाइड्स में देखें...
A man had struggle to prove himself alive
lal bihari - फोटो : अमर उजाला
आजमगढ़ के एक व्याक्ति को भू-राजस्व अभिलेखों में खुद को जिंदा साबित करने के लिए 18 वर्ष तक संघर्ष करना पड़ा। आखिरकार वह खुद को जिंदा करने में सफल रहा। मुआवजे और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में चल रहे मामले को लेकर एकबार फिर वह चर्चा में हैं। हाईकोर्ट ने सरकार ने पूछा है कि ‘भूत को मुआवजा क्यों न दिया जाए’। साथ ही कोर्ट ने जिलाधिकारी से इस मामले में दोषी अधिकारियों के नाम पूछे हैं।
A man had struggle to prove himself alive
demo pic
जिले के निजामाबाद तहसील क्षेत्र के खलीलाबाद गांव निवासी लालबिहारी ‘मृतक’ के पिता का बचपन में ही निधन हो गया था। पिता की मौत की बाद वह मुबारकपुर थाना क्षेत्र के अमिलो में रहते थे। पट्टीदारों ने इसका फायदा उठाकर अभिलेखों में उन्हें मृत दिखाकर उनकी सारी संपत्ति पर कब्जा कर लिया। व्यवसाय के लिए ऋण लेने के लिए जाति और निवास पत्र बनवाने के क्रम में उन्हें पता चला कि 30 जुलाई 1976 को न्यायालय नायब तहसीलदार सदर ने उन्हें अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया है। इसके बाद खुद को जीवित घोषित कराने के लिए उन्होंने तमाम जतन किए। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
A man had struggle to prove himself alive
demo pic - फोटो : अमर उजाला
नौ सितंबर 1986 को उन्होंने विधानसभा में पर्चा फेंका। वह तत्कालीन विधायक स्व. काजी कलीमुर्रहमान के पास पर विधानसभा में घुसे थे। इस पर भी बात नहीं बनी तो उन्होंने निजामाबाद एसओ को 500 रुपये घूस देकर खुद को 151 धारा में जेल भेजने के लिए कहा। लेकिन जैसे ही एसओ को उनके बारे में जानकारी हुई उसने पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद उन्होंने अपने चचेरे भाई का अपहरण कर लिया कि शायद पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दे लेकिन पुलिस ने भाई को तो छुड़ाया लेकिन मृतक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 

 
विज्ञापन
A man had struggle to prove himself alive
demo pic
1988 में इलाहाबाद संसदीय सीट से उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह और बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कांशीराम के खिलाफ चुनाव लड़ा। लेकिन मकसद हल नहीं हुआ। वर्ष 1989-90 में उन्होंने अमेठी से राजीव गांधी के खिलाफ तथा 1992 में आजमगढ़ की मुबारकपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। यही नहीं खुद के जिंदा रहते उन्होंने अपनी पत्नी को विधवा पेंशन दिलाने के लिए आवेदन किया। लंबी लड़ाई के बाद जिला प्रशासन ने 30 जून 1994 को लालबिहारी को अभिलेखों में जिंदा कर दिया। 


 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed