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यहां पानी से हो रहा प्रदूषण का उपचार, बदल गई तस्वीरें लेकिन हालात जस के तस

Mon, 04 Nov 2019 08:46 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 04 Nov 2019 08:46 PM IST
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Treatment of pollution by water in varanasi
पानी छिड़काव से पहले और बाद की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
शहर हो या देहातए हर जगह सांस लेना दूभर हो गया है। लोग हांफने लगे हैं। चारों तरफ धुंध छाया है। यानी वायु प्रदूषण की स्थिति बेहद ख़राब होती जा रही है। दीपावली के बाद जहरीली हुई बनारस की हवा में प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। आज सोमवार को जगह-जगह पेड़ों पर पानी का छिड़काव कराया गया। इससे लोगों को कुछ राहत मिली है। लेकिन वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार नहीं दिख रहा है।
Treatment of pollution by water in varanasi
पानी छिड़काव से पहले और बाद की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
सुधार केवल तस्वीरों में है। एक नवंबर से वायु गुणवत्ता के आंकड़े 300 से अधिक जा रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 4 नवंबर को एक्यूआई 325 पर कायम रहा। यह 3 नवंबर को भी 325 ही था। हालांकि 2 नवंबर को एक्यूआई 335 था। 1 नवंबर को 357 और 31 अक्टूबर को एक्यूआई 290 था।ऐसे में दैनिक गतिविधियों में व्यस्त आम जन सांस संबंधी बिमारियों से ग्रस्त हो रहा है और जो व्यक्ति पहले से श्वास संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं उनके लिए तो यह हवा प्राणघातक है।
Treatment of pollution by water in varanasi
पानी छिड़काव से पहले और बाद की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
राजधानी दिल्ली में इसी बढ़ते प्रदूषण के कारण जन स्वास्थ्य आपातकाल एक नवंबर से घोषित किया जा चुका है लेकिन प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में वायु गुणवत्ता बेहद ख़राब होने के बावजूद ना तो जिला प्रशासन और ना ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बढ़ते प्रदूषण को संज्ञान में लेते हुए कोई भी कार्रवाई कर रहा है। वायु गुणवत्ता के आंकड़े प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ही उनकी वेबसाइट पर जारी किए जाते हैं तब भी बढ़ते प्रदूषण के आंकड़ो की अनदेखी की जा रही है।
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Treatment of pollution by water in varanasi
पानी छिड़काव के बाद की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
वायु प्रदूषण पर कार्यरत संस्था क्लाइमेट एजेंडा लगातार बढ़ते प्रदूषण की चेतावनी दे रहा है और इसको रोकने की मांग कर रहा है।  जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दोनों ही कोई कदम नही उठा रहे हैं। स्मार्ट सिटी के अंतर्गत शहर के 15 चौराहों पर वायु गुणवत्ता के आंकड़े साझा किए जाने के लिए लागाए हैंए लेकिन किसी एक में भी आकडे और स्वास्थ्य सलाह जारी नहीं की जा रही है। ऐसे में आम आदमी बिलकुल असहाय महसूस कर रहा है कि प्रदूषण से बचने के लिए वो क्या उपाय अपनाए।
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Treatment of pollution by water in varanasi
वायु प्रदूषण का हाल सांकेतिक तस्वीर।
शहर में ग्रीन स्पेस 2.3 स्थानों को छोड़ कर कहीं नही बचा है। वहीं दूसरी तरफ पुराने मकानों को गिरा कर फ्लैट बनाने की होड़ इस शहर की आबो हवा खराब करने में सबसे ज्यादा मददगार साबित हो रही है। मानकों का ध्यान रखे बगैर गली.मोहल्लों और कालोनियों में जिस तरह से बड़े.बड़े मकानों को गिराया जा रहा है उससे उठने वाली धूल पूरे वातावरण को बर्बाद कर रही है। लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है।  
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