खाकी की करतूत ने राजधानीवासियों को हिला दिया। जिसने भी विवेक की हत्या की बात सुनी, उसका गुस्सा फूट पड़ा। मकदूमपुर पुलिस चौकी से लोहिया अस्पताल, पोस्टमार्टम हाउस और न्यू हैदराबाद स्थित आकाशगंगा अपार्टमेंट तक हर तरफ पुलिस के खिलाफ माहौल बन गया। सोशल मीडिया पर भी पुलिस विरोधी कमेंट्स की बाढ़ आ गई। अपार्टमेंट में कल्पना और उनकी बेटियों के आंसू देखकर लोग गमगीन हो गए।
विवेक हत्याकांडः खाकी के हैवानों ने उजाड़ दिया हंसता-खेलता परिवार
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लोगों का कहना था कि विवेक काफी सुलझे हुए व्यक्ति थे। लोगों से बड़ी आसानी से घुल-मिल जाते थे। किसी बात का संकोच नहीं करते थे। दो दिन पहले उन्हें कुछ आठ-दस रुपये के छुट्टे की जरूरत थी तो अपार्टमेंट के एक युवक से मांग लिए थे। जरूरत पड़ने पर वह सबकी मदद करते थे। त्योहारों पर वह अपार्टमेंट के चौकीदार से लेकर अन्य कर्मचारियों तक का ख्याल रखते थे। उन्हें रुपये व तोहफे देते थे। अपार्टमेंट के लोगों ने बताया कि विवेक का छोटा सा परिवार बहुत ही खुशगवार था। पत्नी और बच्चों को कोई कमी नहीं थी। रहन-सहन और खाना-पीना अच्छा था।
दोनों बेटियां सिटी मान्टेसरी स्कूल की महानगर शाखा में पढ़ती हैं। बड़ी बेटी शिवी छठी में है और छोटी शानू तीसरी में पढ़ रही है। विवेक के पिता स्व. धर्मराज तिवारी बैंक में थे। सेवानिवृत्ति के बाद उनका देहांत हुआ था। उनके दो भाई और हैं। एक सूरत में नौकरी करता है जबकि छोटा भाई नीरज सुल्तानपुर में रहकर नौकरी करता है। उनकी मां अगुना भी सुल्तानपुर में ही रहती हैं।
पोस्टमार्टम में गोली लगने से मौत की पुष्टि
विवेक का शव सुबह करीब आठ बजे मॉर्च्युरी लाया गया। साढ़े आठ बजे एक्सरे के बाद पोस्टमार्टम शुरू किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से विवेक तिवारी की मौत की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक गोली उनकी ठोड़ी में लगी और सिर की हड्डी से टकराकर गर्दन में जा फंसी। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया है। विसरा भी सुरक्षित रखा गया है।
मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग, क्रियाकर्म रोका
विवेक का शव पोस्टमार्टम के बाद आकाशगंगा अपार्टमेंट पहुंचा तो कोहराम मच गया। अपार्टमेंट के लोग परिसर में जुट गए और पुलिस को कोसने लगे। विवेक की पत्नी कल्पना, बेटी शिवी और शानू रोते-रोते बेसुध हो गईं। उनकी हालत देखकर महिलाएं रो पड़ीं। परिवारीजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुलाने की मांग की। विवेक के साले विष्णु शुक्ला और अन्य परिवारीजनों ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री नहीं आएंगे, क्रियाकर्म नहीं किया जाएगा। मौके पर उपस्थित पुलिस अधिकारी उन्हें समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे।