बरेली के हाफिजगंज में पीलीभीत हाईवे के बाइपास पर शुक्रवार शाम पांच बजे गन्ने से भरा ओवरलोड ट्रक एक कार पर पलट गया। इससे कार ट्रक और गन्ने के नीचे दब गई। घंटेभर चले बचाव अभियान के बाद जब ट्रक व गन्ना हटाया गया तो कार सवार हेड कांस्टेबल नौशाद सुरक्षित निकल आए। उनके हाफिजगंज और बदायूं स्थित घरों में जश्न का माहौल है।
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एक घंटे बाद सही सलामत निकले नौशाद अहमद
- फोटो : अमर उजाला
हेड कांस्टेबल है नौशाद अहमद
बदायूं शहर में कटरा ब्राह्मपुर निवासी 50 वर्षीय नौशाद अहमद पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल हैं। उनकी तैनाती बिजनौर के सिवाया कलां थाने में है। रिठौरा में तैनाती के दौरान नौशाद ने हाफिजगंज में बाइपास पर मकान बना लिया है और परिवार के कुछ सदस्य यहां रहते हैं। नौशाद ने बताया कि शाम पांच बजे वह कार से नवाबगंज जा रहे थे। बाइपास पर वह पुलिया के पास पहुंचे तो नवाबगंज की ओर से आ रहा गन्ना भरा ओवरलोड ट्रक उनकी कार पर पलट गया।
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एक घंटे बाद सही सलामत निकले नौशाद अहमद
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पूरी तरह ट्रक से दब गई थी कार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार पूरी तरह से ट्रक के नीचे दब गई। उसके ऊपर गन्ने का अंबार भी था। बाहर से सिर्फ कार के पहिये दिख रहे थे। सूचना पर पुलिस पहुंची। ग्रामीण खुद भी गन्ना हटाने में जुट गए। हाईवे पर काम कर रही कंपनी की क्रेन व जेसीबी मंगाई गई। दो क्रेन व जेसीबी की मदद से घंटेभर बाद ट्रक को उठाया गया। कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। क्रेन की मदद से कार को खींचा गया। उसमें फंसे नौशाद को एंबुलेंस से अस्पताल भिजवाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।
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एक घंटे बाद सही सलामत निकले नौशाद अहमद
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एक्सीलेटर में फंसे थे पैर, सीट पर लेटकर बचाई जान
जाको राखे साइयां मार सके न कोई, इस कहावत को लोगों ने हाफिजगंज में शुक्रवार को अपनी आंखों के सामने सच होते देखा। कार में दबे दीवान नौशाद हुसैन ने भी घंटे भर में कई बार अल्लाह को याद किया, हालांकि घबराने की बजाय उन्होंने जीवित रहने का हर जतन किया और उसमें कामयाब रहे।
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कार के ऊपर पलटा ट्रक
- फोटो : अमर उजाला
सीट पर बैठने के मुद्रा में बैठे तो बची जान
घटना के बाद हाफिजगंज में अपने घर पहुंचे नौशाद ने अमर उजाला टीम को बताया कि वह उस घड़ी को याद कर सिहर जाते हैं जब वह घर से कार लेकर निकले थे। उन्होंने बताया कि सामने से धीमी गति से आता ट्रक उनकी कार के ऊपर गिर पड़ा। उन्होंने ट्रक गिरता देखकर कार से निकलने की कोशिश की लेकिन देर हो चुकी थी। गनीमत रही कि वह सीट पर बैठने की मुद्रा की बजाय लेटने की मुद्रा में आ गए, ऐसा न होता तो कार की छत पिचकने के साथ सिर में घुस गई होती।