चैत्र नवरात्र मेला समाप्त होने के बाद बैसाख प्रतिपदा पर रविवार को विंध्याचल में सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया गया। गंगाजल से गर्भगृह सहित मां विंध्यवासिनी मंदिर के कोने-कोने की धुलाई हुई। माता के दरबार में वार्षिक घटाभिषेक के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ा। इस अवसर पर पूरा विंध्य क्षेत्र माता के जयकारे से गूंज उठा।
इसमें विंध्याचल नगरवासियों सहित श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारियों, सदस्यों और तीर्थ पुरोहितों ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। मां के भक्तों ने पक्का घाट से घड़े में गंगा जल लाकर मां व उनके परिसर को स्नान कराकर पूरे विंध्य क्षेत्र को पवित्र करने का अनुष्ठान किया। गंगा से मंदिर तक भक्तों का तांता लगा था। इस दौरान सुबह नौ बजे से 12 बजे तक तीन घंटे के लिए माता का दरबार आम श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन के लिए बंद रहा। दोपहर में राजश्री आरती श्रृंगार के पश्चात मंदिर का कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोला गया।
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विंध्याचल मंदिर में घटाभिषेक
- फोटो : अमर उजाला
चिलचिलाती धूप की परवाह किए बगैर श्रद्धालुओं ने मिट्टी और पीतल के मटके में पक्का घाट से गंगाजल लाकर मंदिर की धुलाई की। इस कार्य में छोटे-बड़े और महिलाओं-पुरुषों में बराबर उत्साह देखा गया।
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विंध्याचल मंदिर में घटाभिषेक
- फोटो : अमर उजाला
नंगे पांव और भीगे बदन चिलचिलाती धूप की परवाह किए बिना श्रद्धालु गंगा से जल लाने और धुलाई में लगे रहे। धुलाई के बाद ढोल नगाड़े, शहनाई की गूंज के साथ मां विंध्यवासिनी मंदिर सहित सभी देवी-देवताओं का शृंगार व पूजन तथा भव्य आरती की गई। इसके बाद मंदिरों के कपाट खोल दिए गए।
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विंध्याचल मंदिर में घटाभिषेक
- फोटो : अमर उजाला
मान्यता के अनुसार प्रतिवर्ष वैशाख कृष्ण प्रतिपदा के दिन जगत जननी मां विंध्वासिनी का घटाभिषेक होता है। इस अवसर पर श्रद्धालु श्रद्धा और विश्वास के साथ गंगा में गोता लगाकर मिट्टी के पात्र घड़ा में एवं अन्य जलपात्रों में गंगाजल भर उस पर माता के नाम के साथ ओम, स्वस्तिक व विभिन्न मंत्र लिखकर, फूल-माला चढ़ाकर मां विंध्यवासिनी के दरबार में जल अभिषेक करते हैं। इस अवसर पर पूरा विंध्य क्षेत्र माता के जयकारे से गूंज रहा था।
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विंध्याचल मंदिर में घटाभिषेक
- फोटो : अमर उजाला
घटाभिषेक में श्रद्धालु अपनी मन्नत के अनुसार भी सेवा करते हैं। ऐसे श्रद्धालु जिसकी मन्नतें पूरी हो जाती है वह बैसाख प्रतिपदा पर पांच या 11 से लेकर 51 घड़े जल से मां का अभिषेक करते हैं। शाम को श्री विंध्य पंडा समाज की ओर से विशेष पूजा की जाएगी।