मेरठ में हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र में भीकुंड गंगा पुल पर आवागमन के लिए प्रशासन की ओर से तीन दिन पहले लगाई गई नाव को हटा लिया गया है। यहां नाव और अवैध रूप से संचालित ट्रैक्टर-ट्रॉली के चालक द्वारा लोगों से वसूली की जा रही थी। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
अमर उजाला की खबर का असर: प्रशासन ने हटाई नाव, ग्रामीणों ने कराई सड़क की मरम्मत, सामने आई थी भ्रष्टाचार की तस्वीरें
दूसरे दिन तक होती रही अवैध वसूली
खादर क्षेत्र में बाढ़ आने के कारण बही भीमकुंड पुल की एप्रोच रोड पर आवागमन के लिए प्रशासन ने नाव की निशुल्क व्यवस्था कराई थी। लेकिन कुछ दबंगों ने यहां किराए के नाम पर लोगों से उगाही शुरू कर दी। मंगलवार को अमर उजाला ने इसका खुलासा किया था। इसके भी यहां वसूली बंद नहीं हुई। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
वहीं रविवार को राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने क्षेत्र का दौरा किया था। इसके बाद प्रशासन ने यहां सरकारी नाव तैनात कराई थी। लेकिन यहां पर नाव चालकों ने वसूली शुरू कर दी। बिना अधिकारियों की परमिशन के एक ट्रैक्टर-ट्रॉली लगा ली गई। नाव और ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक दो दिनों तक वसूली करते रहे। चांदपुर निवासी सतीश, हरपाल, अमरोहा निवासी सौरभ, आशीष आदि राहगीरों का कहना था कि जरूरी काम से मेरठ आना पड़ता है। इस पुल से गुजरने से दूरी कम हो जाती है। पानी कम होने के बाद भी विभागीय अधिकारी मरम्मत कार्य नहीं करा रहे हैं।
सपा कार्यकर्ताओं ने किया था हंगामा
भीकुंड गंगा पुल पर सरकारी नाव और प्राइवेट ट्रैक्टर चालकों द्वारा की जा रही वसूली के विरोध में मंगलवार को सपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा कर सड़क दुरुस्त कराने की मांग की थी। सपा नेता किशोर टांग के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं मौके पर पहुंचे। यहां हंगामे के बाद उन्होंने हालात से एसडीएम को अवगत कराया। एसडीएम ने मामले पर संज्ञान लेने की बात कही। किशोर टांक ने दावा किया कि बाइक और बुग्गी वालों से 50 से लेकर 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। उन्होंने वसूली करने वालों पर कठोर कार्रवाई और किसानों को जल्द मुआवजा दिए जाने की मांग की। इस मौके पर नरवैर सिंह, बाबा सुखराम गुरमीत सिंह, रणजीत सिंह, नईमुद्दीन आदि मौजूद रहे।
खेतों में दो दिन पहले भरा था तीन से चार फीट पानी
खादर क्षेत्र में दो दिन पहले हालात सामान्य नहीं थे। खेतों में तीन से चार फीट तक पानी भरा था। कई मार्ग भी जलमग्न थे। शुगर मिल अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ ने गन्ना किसानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। शासन के निर्देश पर शुगर मिलों को 27 अक्तूबर के बाद चलाने की तैयारी थी। लेकिन बाढ़ ने तैयारियों पर पानी फेर दिया। ऐसे में पेराई सत्र में देर होने की आशंका है। क्षेत्र के किसान ऋषि पाल सिंह, विपिन चौधरी, प्रवीण कुमार, सुंदर सिंह ने बताया कि खादर क्षेत्र में नुकसान की भरपाई करना असंभव है।