सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद जेल में उनकी स्थिति और आगे की कानूनी लड़ाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जेल अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सजा की घोषणा के बाद दोनों ने चिंता जताई। मुस्कान ने अपनी अधिवक्ता से संपर्क कराने और हाईकोर्ट में पैरवी की व्यवस्था करने की गुजारिश की, जबकि साहिल ने अपनी जिंदगी बर्बाद होने की बात कही।
नीला ड्रम हत्याकांड में फांसी: साहिल बोला- जिंदगी बर्बाद हो गई, मुस्कान ने पूछा- हाईकोर्ट में कौन करेगा पैरवी?
सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मुस्कान और साहिल की प्रतिक्रिया सामने आई है। मुस्कान ने हाईकोर्ट में पैरवी को लेकर चिंता जताई। जानें अपील और कानूनी सहायता के विकल्प।
सजा सुनने के बाद कानूनी मदद मांगने लगी मुस्कान
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, मुस्कान ने उनसे अपनी अधिवक्ता रेखा जैन से बात कराने की गुजारिश की। उसने हाईकोर्ट में पैरवी को लेकर चिंता जताई और अपनी बेटियों के भविष्य का भी जिक्र किया।
जेल अधिकारियों के अनुसार, मुस्कान ने कहा कि उसकी अधिवक्ता से बात कराई जाए, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया के संबंध में बातचीत हो सके। मृत्युदंड के बाद अपील की तैयारी और कानूनी सहायता हासिल करना दोनों दोषियों के लिए अहम कदम होंगे।
मुस्कान ने अपनी दो बेटियों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। मामले में पहले जेल अधिकारियों की ओर से बताया गया था कि उसकी 10 महीने की बेटी फिलहाल उसके साथ जेल में रह रही है। बच्ची की आगे की व्यवस्था संबंधित नियमों और परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएगी।
जेल सूत्रों के मुताबिक, सजा सुनाए जाने के बाद साहिल ने भी निराशा जताई। उसने जेल अधीक्षक से कहा कि उसकी जिंदगी बर्बाद हो गई है और अब आगे क्या होगा, इसे लेकर उसे भरोसा नहीं है।
जेल प्रशासन के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सजा के बाद दोनों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है। उनकी बैरकों पर विशेष नजर रखी जा रही है और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों दूसरे बंदियों से पहले की तुलना में कम बातचीत कर रहे हैं।
हालांकि, उनकी मानसिक स्थिति के संबंध में किसी स्वतंत्र चिकित्सकीय आकलन की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए जेल सूत्रों की ओर से बताई गई प्रतिक्रियाओं को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मुस्कान और साहिल के पास कानून के तहत आगे की प्रक्रिया अपनाने का विकल्प है। वरिष्ठ अधिवक्ता पवन प्रधान के मुताबिक, ऐसे मामलों में हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है और गंभीर मामलों में जरूरत पड़ने पर पात्र बंदियों को विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता भी मिल सकती है।
अधिवक्ता के अनुसार, दोषियों के पास आगे सुप्रीम कोर्ट जाने के विकल्प भी हो सकते हैं। हालांकि, अपील की समयसीमा और प्रक्रिया मामले के आदेश, लागू कानून और संबंधित न्यायालय के नियमों के अनुसार तय होगी।
मृत्युदंड के मामले में सत्र न्यायालय के फैसले की उच्च न्यायालय से पुष्टि आवश्यक होती है। इसलिए सजा सुनाए जाने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया जारी रहती है। आगे की स्थिति उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई और कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपायों पर निर्भर करेगी।
जेल प्रशासन की निगरानी बढ़ी
मामले में मृत्युदंड का फैसला आने के बाद जेल प्रशासन दोनों दोषियों की सुरक्षा और निगरानी पर विशेष ध्यान दे रहा है। जेल अधिकारियों के अनुसार, उनकी बैरकों पर नजर रखी जा रही है और उनकी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।
अब आगे की कानूनी प्रक्रिया में अधिवक्ता से संपर्क, हाईकोर्ट में अपील और मृत्युदंड की पुष्टि जैसे पहलू अहम होंगे। दोनों की ओर से कानूनी विकल्प अपनाए जाने के बाद मामले की अगली दिशा स्पष्ट होगी।