लोकसभा के बाद राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास होने को लेकर मुस्लिम महिलाओं ने नाराजगी जताई है। मुस्लिम महिलाओं का मानना है कि तीन तलाक बिल पास होने से उन्हें इसका नुकसान अधिक उठाना पड़ेगा। सरकार को चाहिए कि वह महिलाओं की तरक्की, रोजगार, शिक्षा और उन्हें आरक्षण देने की तरफ ध्यान केंद्रित करे ताकि महिलाओं का भला हो सके।
तीन तलाक बिल पास होने पर मुस्लिम महिलाएं नाराज, पढ़िए- आखिर क्या है इनकी राय
मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक बिल की जरूरत नहीं: सबा
सरकार बिना वजह शरीयत में दखलंदाजी कर रही है। इसके पीछे सरकार की मंशा क्या है यह आज तक साफ नहीं हो सका। देश की करोड़ों महिलाएं पहले ही कह चुकी हैं कि उन्हें तीन तलाक बिल किसी कीमत पर मंजूर नहीं होगा। इसको लेकर मुस्लिम महिलाएं हस्ताक्षर युक्त पत्र राष्ट्रपति को भी भेज चुकी हैं, लेकिन सरकार किसी रणनीति के तहत उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। सरकार को महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और आरक्षण देने की बात करनी चाहिए।
- सबा हसीब सिद्दीकी, प्रधानाचार्य पब्लिक गर्ल्स इंटर कॉलेज
तीन तलाक कानून महिलाओं का घर तोड़ने वाला: खुर्शीदा
केंद्र सरकार कानून के रास्ते शरीयत में हस्तक्षेप कर रही है जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुस्लिम महिलाएं पहले भी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ थीं और आगे भी उसके साथ मजबूती के साथ खड़ी रहेंगी। सरकार तीन तलाक बिल को लेकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि सच्चाई सभी जानते हैं कि यह कानून मुस्लिम महिलाओं का घर तोड़ने वाला है।
- खुर्शीदा खातून, प्रबंधक-जामिया इल्हामिया मदरसातुल बनात
मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव की गुंजाइश नहीं: फातिमा
मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी तरह भी बदलाव की गुंजाइश नहीं है। इस्लाम में जिसे हराम करार दिया गया है वो हराम है और जिसे हलाल कहा गया है वो हलाल है। इसलिए मुस्लिम महिलाएं शरीयत के मुताबिक अपनी जिंदगी गुजारेंगी। केंद्र मुस्लिम महिलाओं को परेशान करने के लिए तीन तलाक बिल जबरन लेकर आई है जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
-जहीर फातिमा
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